जिले में सेब आदि फलों की बागवानी किसानों के लिए समृद्धि के द्वार खोल सकती है। सेब उत्पादन में अग्रणी जनपद में अभी तक बागवानी की 50 फीसदी संभावनाओं का भी उपयोग नहीं हो पाया है। कोरोना महामारी की वजह से हुआ रिवर्स पलायन और आने वाले मंदी के दौर में रोजगार का संकट जिले में बागवानी की संभावनाओं की ओर इशारा कर रहा है।
सेब के अलावा जनपद में आड़ू, खुमानी, पुलम, कीवी, चेरी, नैक्ट्रीन, नाशपाती, अखरोट, बादाम आदि की बागवानी की काफी संभावनाएं हैं। जनपद में अभी तक बागवानी योग्य जमीन का महज 40 से 50 फीसदी ही उपयोग में लाया जा रहा है। जिले की फल पट्टी वाले उपला टकनौर, स्योरी नौगांव और आराकोट बंगाण क्षेत्र में किसान बागवानी से सालाना 2 से 10 लाख रुपये तक कमाते हैं। प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र डा. पंकज नौटियाल का कहना है कि रूट स्टाक तकनीकी से तैयार सेब, आड़ू, नैक्ट्रीन, पुलम, चेरी, नाशपाती, अखरोट की बागवानी दो-तीन साल में ही अच्छा नतीजा दे सकती है। बागवानी के क्षेत्र में कटिंग, प्रूनिंग आदि कार्यों में रोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। सहायक उद्यान अधिकारी एनके सिंह का कहना है कि जिले में बागवानी की अपार संभावनाएं हैं। लोग आगे आएं तो केंद्र पोषित एवं राज्य की बागवानी विकास की योजनाओं की कमी नहीं है।