तेखला गदेरे को अस्थायी डंपिंग जोन
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मोदी सरकार देश में नमामि गंगे योजना पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन गंगा के उद्गम में ही गंदगी डालकर गंगा की स्वच्छता को खराब किया जा रहा है। कचरा प्रबंधन की ठोस व्यवस्था न होने से के चलते लोग मनमर्जी से गंदगी यहां वहां फेंक रहे हैं, जिससे इस योजना को करारा झटका लग रहा है।
अव्यवस्थित इलाके में कूड़ा डाले जाने से यह बहकर गंगा नदी में जा रहा है। धार्मिक नगरी उत्तरकाशी में कचरा प्रबंधन की समस्या वर्षों से बनी है। नगरपालिका और प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद कचरा प्रबंधन के लिए ठोस जगह तक चयनित नहीं की गई, जिसके चलते कचरे की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
शहर का कूड़ा अस्थायी रूप से जिला मुख्यालय से लगभग तीन किमी दूर तेखला गदेरे में उड़ेला जा रहा है। कई वर्षों से तेखला गदेरे को अस्थायी डंपिंग जोन के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। नौ माह पहले ग्रामीणों ने लामबंद होकर यहां कूड़ा डालने का विरोध किया। जगह न मिलने पर कई दिनों तक शहर में कचरा प्रबंधन नहीं हो सका।
कचरे से बेहाल उत्तरकाशी शहर स्थित जियोग्रिड वाल के पीछे आनन-फानन में पालिका को कचरा डंप करना पड़ा लेकिन शहर में कचरे से उठती दुर्गंध और व्यापारियों के विरोध को देखते हुए पालिका को फिर तेखला में ही कूड़ा डंप करना पड़ा। अब एक बार फिर तेखला के ग्रामीणों ने यहां कूड़ा डालने का विरोध जताया है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही कूड़ा निस्तारण कहीं और नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। तेखला में कूड़ा डंपिंग पर ग्रामीणों की आपत्ति के बाद पालिका प्रशासन हरकत में आया है। नगरपालिका अध्यक्ष जयेंद्री राणा का कहना है कि जल्द ही शहर को कूड़ा निस्तारण की समस्या से निजात मिलेगी। इसके लिए शासन से 19 लाख रुपये मिले हैं। मस्जिद मोहल्ले में जल्द ही कंपेक्टर मशीन लगा दी जायेगी।