वन विभाग ने एक बंगले को नाम दिया फ्रेडरिक विल्सन
हर्षिल के ही माधवेंद्र सिंह रावत और बालम दास ने इसके पूरे बोल लिखने में मदद की। हर्षिल में फ्रेडरिक विल्सन का एक लकड़ी का बंगला हुआ करता था, जो अग्निकांड में जल गया था। इसके स्थान पर वन विभाग ने एक बंगला तैयार कर उसे फ्रेडरिक विल्सन का नाम दिया है। फ्रेडरिक विल्सन अपने जमाने के एक प्रसिद्ध वन ठेकेदार थे, जो कि हर्षिल से स्लीपर काटकर से उसे नदियों के सहारे निचले क्षेत्रों तक भेजा करते थे। अपने जीवनकाल में ही उन्होंने अपने तीनों बेटों का विवाह किया।
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1883 में फ्रेडरिक विल्सन की मृत्यु हो गई थी, उन्हें मसूरी के कैमल्स बैक रोड कब्रिस्तान में दफनाया गया। फ्रेडरिक के तीनों बेटे अपने पिता की विरासत को आगे नहीं बढ़ा सके और समय के साथ फ्रेडरिक विल्सन की यादें धुंधली होती चली गई, लेकिन लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के इस लोकगीत से फ्रेडरिक विल्सन की पुरानी याद फिर ताजा हो गई है।