यमुनोत्री में केदार पर दांव खेलकर आखिरकार भाजपा पहली बार कमल खिलाने में कामयाब रही है। पिछले तीन विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां मुंह की खानी पड़ी थी। भाजपा के प्रत्याशी यहां दूसरे स्थान पर भी जगह नहीं बना पाए।
राज्य गठन के बाद 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में यमुनोत्री विधानसभा से भाजपा ने सुलोचना गौड़ को अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन कांग्रेस के केदार सिंह और यूकेडी के प्रीतम सिंह पंवार के आगे भाजपा का गणित यहां फेल हो गया और सुलोचना गौड़ 5584 मत लेकर तीसरे स्थान पर रही। तब यूकेडी के प्रीतम सिंह पंवार 9498 मत लेकर पहले और कांग्रेस के केदार सिंह रावत 7013 मत लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे।
इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने एक बार फिर से महिला प्रत्याशी को मैदान उतारा, लेकिन भाजपा प्रत्याशी विमला नौटियाल 6283 मतों पर सिमट गई। 2007 विस चुनाव में कांग्रेस के केदार सिंह रावत 14484 मतों के साथ पहले और यूकेडी के प्रीतम सिंह पंवार 11156 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे। 2012 के विस चुनाव में भाजपा ने यहां पहली बार किसी पुरुष प्रत्याशी पर दांव आजमाया था।
उस समय भाजपा ने यहां जगवीर सिंह भंडारी को मैदान में उतारा था। जगवीर सिंह भंडारी 11961 वोट खींचने में तो कामयाब रहे, लेकिन कांग्रेस और यूकेडी के दिग्गजों को नहीं पछाड़ गए। वर्ष 2012 के विस चुनाव में यूूकेडी के प्रीतम दूसरी बार चुनाव जीते थे।
प्रीतम सिंह पंवार 15909 मतों के साथ पहले और कांग्रेस के केदार सिंह रावत 13313 मतों के साथ दूसरे पायदान पर रहे थे। इस बार भाजपा नेने केदार रावत पर दांव खेला और यमुनोत्री में भाजपा का चुनाव जीतने का सूखा खत्म हुआ। केदार सिंह रावत की भी इस विस चुनाव में करीब 20 साल बाद भाजपा में वापसी हुई है।