उत्तरकाशी पर्यटकों को आकर्षित कर रही डोडीताल की खूबसूरत वादियां।
नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर डोडीताल क्षेत्र पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। डोडीताल में सुंदर झील, दुर्लभ प्रजाति की मछलियां और बर्फीले बुग्याल पर्यटकों का पसंदीदा ट्रैक बनता जा रहा है, लेकिन सरकारी उपेक्षा के चलते यहां उम्मीद के अनुरूप पर्यटक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
समुद्रतल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित 21 किमी ट्रैकिंग व ग्लेश्यिर के पानी वाली डोडीताल झील में दुनिया की दुर्लभ ब्राउन ट्राउट प्रजाति की मछलियां हैं। बताया जाता है कि रियासत काल में कुछ विदेशी पर्यटकों ने झील में ब्राउन ट्राउट पनपाई थी। उसी दौरान संगमचट्टी के पास कल्याणी में ब्राउन ट्राउट के संरक्षण के लिए मत्स्य प्रजनन प्रक्षेत्र भी विकसित किया गया था, लेकिन वह 2012-13 की बाढ़ में बह गया।
आपदा के बाद से डोडीताल में पर्यटकों की तादाद में कमी आई है। गत वर्ष डोडीताल महज 15 से 20 पर्यटक ही पहुंचे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि डोडीताल पर्यटकों का पसंदीदा ट्रैक रहा है। असी गंगा के उद्गम डोडीताल में ट्राउट की मौजूदगी से नदी का यह 20 किमी क्षेत्र इस दुर्लभ प्रजाति का प्रवास स्थल बन गया है।
उत्तरकाशी से दस किमी वाहन की पहुंच वाले संगमचट्टी से चार किमी पैदल अगोड़ा तथा यहां से बेवरा, छोटी व बड़ी उड़कोटी, मांझी होते हुए 16 किमी ट्रैकिंग कर डोडीताल पहुंचते है। आपदा से ध्वस्त डोडीताल रूट को वैकल्पिक तौर पर वन विभाग ने खोला जरूर है, लेकिन पैदल रास्ता जोखिमभरा बना है। डीएफओ संदीप कुमार बताते हैं कि आपदा से ध्वस्त डोडीताल रूट को वैकल्पिक तौर पर सही किया जाएगा।