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डाक्टरों-कर्मियों की हड़ताल से मरीज परेशान

Mon, 11 Jan 2016 08:58 PM IST
अमर उजाला उत्तरकाशी
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दूसरी ओर कंपनी के चिकित्सक एवं कार्मिकों की हड़ताल को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने यहां वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर दो डाक्टर, एक फार्मासिस्ट एवं तीन जीएनएम की तैनात की है। ये डाक्टर इमर्जेंसी और ओपीडी सेवाएं तो दे रहे हैं, लेकिन अस्पताल में जांच, एक्सरे आदि सेवाएं ठप होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश मरीज उपचार के लिए देहरादून की दौड़ लगाने को मजबूर हैं।
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 नौगांव की ब्लाक प्रमुख रचना बहुगुणा ने कहा कि इस तरह अचानक चिकित्सा कर्मियों के हड़ताल पर जाने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग से इस संबंध में त्वरित कार्रवाई की मांग की। धरना प्रदर्शन करने वालों में राजभ्रा कंपनी के डा. रोशन, डा. दिलीप, डा. निशा बेन, डा. खुशबू, दिनेश रावत, राधेश्याम भट्ट, संदीप रावत और संजय आदि कार्मिक शामिल रहे।

कंपनी के चार माह के बिल अभी तक क्लीयर नहीं हुए हैं, जिस वजह से डाक्टर एवं कर्मचारियों के मानदेय भुगतान में दिक्कतें आ रही हैं। सरकार कंपनी के बिल क्लीयर करे तभी उनको मानदेय दिया जा सकेगा। - रजनीश कश्यप, प्रबंध निदेशक राजभ्रा मेडिकेयर कंपनी।
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सीएचसी थत्यूड़ के ताले पांचवें दिन भी नहीं खुले
- वेतन भुगतान न होने तक जारी रहेगी हड़ताल

थत्यूड़ (टिहरी)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थत्यूड़ के ताले सोमवार को पांचवें दिन भी नहीं खुल पाए। वेतन भुगतान की मांग को लेकर आंदोलनरत चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ ने चिकित्सालय परिसर में धरना दिया। कहा कि चार माह से वेतन न मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानी से जूझना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जब तक वेतन का भुगतान नहीं हो जाता तब तक आंदोलन चलता रहेगा। धरनास्थल पर पहुंचे ब्लॉक प्रमुख कुंवर सिंह पंवार ने हड़ताली डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ से वार्ता की। डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि यदि जल्द वेतन का भुगतान नहीं हुआ तो वे आकस्मिक सेवाएं भी ठप कर देंगे। तब प्रमुख पंवार ने स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से वार्ता कर उन्हें हड़ताल से रोगियों को होने वाली परेशानियों की जानकारी दी। मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि शासन स्तर पर जल्द ही समस्या समाधान करने की कोशिश की जा रही है। धरने पर  डॉ. रतन मिश्रा. डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. अंकिता रतूड़ी, डॉ. सुनैन बाला, डॉ. खुशवंत सिंह, डॉ. ऋतुराज और डॉ. प्रकाश बैठे रहे।
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