राज्य में टीबी (क्षय रोग) को हराने में जिला सबसे आगे हैं। यहां टीबी मरीजों के ठीक होने की सफलता दर 94 फीसदी है। विश्व क्षय रोग दिवस पर आयोजित गोष्ठी में स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी दी। इस अवसर पर जिले में टीबी के छह माह का इलाज पूरा करने वाले मरीजों को प्रमाण पत्र देने का निर्णय लिया गया।
बुधवार को रेडक्रॉस भवन में आयोजित गोष्ठी में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. एसडी सकलानी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2030 तक विश्व को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि भारत में वर्ष 2025 और राज्य में 2024 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. सुजाता सिंह ने कहा कि 300 साल पुरानी यह बीमारी लक्षणों को छुपाने और अधूरा इलाज कराने से आज भी बनी हुई है। एसीएमओ विपुल बिस्वास ने कहा कि यह बीमारी किसी को भी हो सकती है। इसलिए टीबी मरीजों के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। इस मौके पर डा.एसएस चौहान, डा.खुशबू, डा.धर्मशक्तू, कार्यक्रम समन्वयक अजय बिष्ट, प्लान इंडिया के प्रबंधक गोपाल थपलियाल, संदीप उनियाल आदि मौजूद रहे।