भारत-चीन सीमा पर स्थित जादूंग गांव में हवाघर सहित श्रीकंठ व्यू प्वाइंट और मुख्य द्वार का निर्माण लटक गया है। इसके लिए कार्यदायी संस्था गढ़वाल मंडल विकास निगम को वन विभाग की ओर से इनके निर्माण के लिए भूमि की अनुमति नहीं मिल पा रही है। वहीं जीएमवीएन ने वहां पर आठ होमस्टे के निर्माण की निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान खाली करवाए गए जादूंग गांव को दोबारा बसाने की कवायद की जा रही है। शासन के निर्देश पर गढ़वाल मंडल विकास निगम की ओर से वहां पर प्रथम चरण में छह होमस्टे का निर्माण किया जा रहा है। इनका कार्य भी अब अंतिम चरण में है। वहीं इसके बाद दूसरे चरण में वहां पर आठ होमस्टे का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए जीएमवीएन ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वहीं तीसरे चरण में नौ होमस्टे का निर्माण किया जाएगा। साथ ही वहां पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हवाघर बैंड, श्रीकंठ व्यू प्वाइंट और मुख्य द्वार का निर्माण होना है। इसके लिए बीआरओ की ओर से अनुमति मिल गई है, लेकिन वन विभाग ने मंजूरी नहीं दी है।
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वहीं अब कार्यदायी संस्था की ओर से प्रयास किया जा रहा है कि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से यह अनुमति मिल सके। जीएमवीएन के अवर अभियंता सचिन रावत ने बताया कि जादूंग में आठ होम स्टे निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं हवाघर बैंड, श्रीकंठ व्यू प्वाइंट और मुख्य द्वार निर्माण के लिए वन विभाग की ओर से अनुमति नहीं मिल पा रही है।