फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जैविक कृषि को नहीं मिल पा रहा बढ़ावा

Mon, 11 Apr 2016 10:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद डुंडा के बाद अब जैविक खेती में ज्यादा रुचि दिखाने वाले किसानों की संख्या देखकर भटवाड़ी ब्लाक को जैविक संतृप्तिकरण योजना में शामिल करने की तैयारी चल रही है।
विज्ञापन


जैविक कृषि के लिए बुनियादी ढांचा तैयार नहीं कर पाने और पूरा कार्यक्रम अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मियों के भरोसे छोड़ा जाना ही इस योजना के परवान न चढ़ने का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

जिले के 17,836 किसान पंजीकृत किए जा चुके हैं और तीन हजार पहले से ही जैविक खेती कर रहे हैं। यहां के किसानों द्वारा उत्पादित लाल मिर्च, रामदाना, मंडुआ, राजमा, झंगोरा, उड़द, गहथ, नौरंगी दाल तथा लाल चावल, कोहिनूर, ग्रीन फेस्टा, डिवाइन एग्रो, पंचावटी, लेडी कैंप, बायोफेक आदि कई निर्यातकों द्वारा खरीदा जा रहा है। कौणी, चिणा, भंगजीरा, कुट्टू तथा सफेद तिल की भारी मांग आ रही है।
विज्ञापन


राज्य में कई सरकारी योजनाओं के बावजूद उत्पादन की स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है। किसानों को जैविक खेती के लिए जोड़ कर इन्हें मार्केटिंग के लिए खरीददार तो बता दिए, लेकिन उत्पादन प्रमोट करने की कहीं कोई व्यवस्था नहीं की गई।

मंडुआ प्रोत्साहन योजना के तहत उत्तरकाशी में 76 क्लस्टर चयनित हुए, जिनसे मंडुआ खरीदकर कृषि विभाग को उसे बेचना भी था। लेकिन योजना में बजट ही नहीं मिला। विवेकानंद कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर तैयार पारंपरिक फसलों के बीज की व्यवस्था भी नहीं हो पाई।

उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद ने केंद्र तथा राज्य की इन योजनाओं के लिए जिले में तकनीकी अधिकारी, मास्टर ट्रेनर, प्रेरक आदि तैनात तो किए, लेकिन संविदा पर तैनात इन अल्प वेतन भोगियों के लिए कहीं ऑफिस तक नहीं है।

उत्तराखंड में उत्पादित जैविक उत्पाद के मानक अमेरिका के समतुल्य तथा कई यूरोपीय देशों से बेहतर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। औषधीय तथा सगंध पादप की भी मांग बढ़ी है। हमें उत्पादन को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
यशवंत बिष्ट, तकनीकी अधिकारी उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद।

अभी तक हमारा केंद्र आठ हजार 140 अधिकारी कर्मचारियों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दे चुका है। वर्ष 2008 से सिक्किम के तीन बैच में 39 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। उत्तराखंड के प्रशिक्षणार्थियों की संख्या छह हजार से ज्यादा है। बाकी उत्तरप्रदेश, राजस्थान, नेपाल, भूटान आदि आए अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
विज्ञापन

डा. देवेंद्र सिंह नेगी, प्रभारी, राज्य जैविक कृषि प्रशिक्षण केंद्र मंजखाली अल्मोड़ा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें