कामरा सांखाल गांव के लिए सड़क न बनने पर लोगों को तहसील और ब्लॉक मुख्यालय आने के लिए जंगल का पैंतीस किमी का रास्ता नापना पड़ता है या फिर देहरादून के लाखामंडल से 44 किमी कच्ची व संकरी सड़क से होकर जाना पड़ता है।
मुश्किल से गांव वालों ने 2008 में बर्नीगाड से गढसारी कमरगढ़ी खेडा कामरा 12 किमी मोटर मार्ग तो स्वीकृत करा लिया किंतु यह अभी लोनिवि विभाग के स्तर से फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए आगे नहीं बढ़ पाया।
करीब पांच सौ की आबादी वाले सड़क वंचित सांखाल, कामरा व मटियालौड गांवों की स्थिति यह है कि गांवों में बेसिक व जूनियर हाईस्कूल होने पर भी गांव के जूनियर में पांच तथा बेसिक में तेरह बच्चे ही स्कूल का मुंह देख पा रहे हैं।
गांव में बिजली की लाइन भी नहीं पहुंची। तीन चार परिवार ने तो अपने लिए किसी तरह सोलर लालटेन का इंतजाम कर लिया लेकिन तीनों गांवों के शेष परिवार आज भी चीड़ के छिलकों और लालटेनों की रोशनी से ही काम चला रहे हैं। यहां सरकार की स्वास्थ्य सेवा भी नदारद दिखती है।