तीन वर्ष पूर्व झील के सौदर्यीकरण पर खर्च किए गए थे 45 लाखमछली के बीज डाले, गाद भरने से मर गई सभी मछलियां
उत्तरकाशी। दयारा बुग्याल के मुख्य पड़ाव बार्सू गांव में पर्यटन व मत्स्य पालन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण झील शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते बदहाल पड़ी है। वहां पर सीएम सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत करीब तीन वर्ष पूर्व 45 लाख खर्च किए गए। साथ ही मत्स्य विभाग की ओर से भी मछली के बीज डाले गए थे लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बार्सू झील में गाद भरने के साथ ही मछलियां भी समाप्त हो रही है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करीब एक किमी चौड़ी झील का निर्माण किया गया। इस पर वहां पर नौकायन सहित मछली पालन शुरू किया गया लेकिन वर्षों से शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते झील अब बदहाल स्थिति में है। स्थानीय निवासी यजुवेंद्र रावत ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व झील में सीएम बीएडीपी के तहत 45 लाख की लागत से सौंदर्यीकरण किया गया।
वहां पर बोटिंग शुरू की गई। साथ ही मत्स्य विभाग की ओर से बीज भी डाले गए लेकिन उसके बाद इसकी ओर किसी ने पलट कर नहीं देखा। अब वहां पर बोट भी खराब हो चुकी है। साथ ही झील में गाद भरने के कारण वहां पर मछलियां समाप्त हो रही है। प्रशासन इस ओर ध्यान देता तो यह पर्यटन के साथ ही गांव के लोगों के लिए स्वरोजगार का माध्यम बनेगा। सहायक निदेशक नितीश कुमार ने बताया कि बार्सू झील में पूर्व में गोल्डफिश मछली के बीज डाले गए थे। निरीक्षण कर दोबारा मछली उत्पादन के लिए उपयोगी बताया जाएगा। दूसरी ओर पर्यटन अधिकारी से फोन पर संपर्क नहीं हो पाया।