सिलक्यारा के पास 3.5 किमी लंबी सुरंग बनने पर जिला मुख्यालय से बड़कोट की दूरी 26 किमी कम हो जाएगी। उतार चढ़ाव और बर्फबारी की मुश्किलों वाले राड़ी टॉप के बाईपास वाले धरासू यमुनोत्री हाईवे के इस प्रयोग से स्थानीय लोगों के साथ यमुनोत्री और गंगोत्री की ओर आने वाले तीर्थयात्रियों की समय की बचत भी होगी।
लोनिवि एनएच खंड बड़कोट ने फारेस्ट क्लीयरेंस और जमीन की मुआवजे का काम निपटाने के बाद दो वर्ष में हाईवे के धरासू जानकीचट्टी तक 75 किमी ऑल वेदर सड़क बनाने का काम पूरा करने की उम्मीद जताई।
धरासू से यमुनोत्री सड़क वाले पड़ाव जानकीचट्टी तक वर्तमान सड़क की दूरी 106 किमी है। इसमें कई डेंजर जोन व भूस्खलन वाले हिस्सों के अलावा जाड़ों में बर्फबारी से 7 हजार फीट की ऊंचाई वाले राड़ी टॉप से गुजरने वाली सड़क सुगम यातायात में बाधा बनी रहती है। अब केंद्र सरकार की चारों धाम ऑल वेदर रोड की घोषणा और बजट आवंटन से यात्रियों की मुश्किलें कम होने के आसार हैं।
धरासू बैंड से जानकीचट्टी तक की दूरी बाईपास रोड मेें सुरंग बनने से 80 किमी रह जाएगी। इस योजना में 150 करोड़ की लागत से वर्तमान हाईवे के धरासू से सिलक्यारा तक 25 किमी व तीन सौ करोड़ की लागत से पोल गांव जानकीचट्टी तक 50 किमी हिस्से को ऑल वेदर रोड बनाई जा रही है। सड़क निर्माण की प्रारंभिक तैयारी शुरू हो गई है।
इस स्थिति में यमुनोत्री तीर्थधाम की यात्रा सुगम हो जाएगी। सड़कें और सुरंग बनने से जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से बड़कोट तहसील मुख्यालय का सफर चार की जगह ढाई घंटे हो जाएगा। सुरंग के दोनों ओर 1.5 किमी की एप्रोच रोड तैयार कर इसकी दोनों सिरों को हाईवे से जोड़ा जाएगा। 918 करोड़ की लागत से बनने वाली सुरंग की कार्यदायी एजेंसी का चयन अभी नहीं हो पाया। राज्य सरकार की एजेंसियां इस काम के लिए प्रयास कर रहीं है।
विभाग ने धरासू सिलक्यारा और पोल गांव से जानकीचट्टी तक 75 किमी सड़क का ऑल वेदर में बदलने का आगणन तैयार कर लिया है। फारेस्ट क्लीयरेंस व जमीन के प्रतिकर देने की तैयारी चल रही है। यह काम निपटाने के बाद दो साल में सड़क तैयार हो जाएगी। सुरंग कब तक तैयार हो पाएगी यह कार्यदायी संस्था पर निर्भर करेगा।
नवनीत पांडेय, ईई, एनएच खंड लोनिवि बड़कोट।