गंगोत्री घाटी के उपला टकनौर क्षेत्र में सेब बागवान फल उतारने के बाद अब पेड़ों को जंगली जानवरों के नुकसान पहुंचाने से परेशान हैं। लंगूर सेब की पेड़ों की टहनियों से नर्म मीठी छाल चट कर रहे हैं तो घुरड़ छोटे पेड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। महीनों से बारिश नहीं से अब उन्हें सूखी घास पर आग पकड़ने से बगीचों के झुलसने की चिंता सताने लगी है।
सेब के सीजन में पहले भालुओं ने फसल को नुकसान पहुंचाया। अब बगीचों में जंगली जानवरों के उत्पात से काश्तकार परेशान हैं। सुक्खी के मोहन सिंह, हर्षिल के डा नागेंद्र, धराली के जय भगवान बताते हैं कि लंगूरों द्वारा सेब की पेड़ों की नर्म छाल चट करने से टहनियां सूख जाती हैं।
उनकी मुसीबत यहीं खत्म नहीं होगी। अब बर्फबारी के बाद जमीन पर घास न मिलने से बड़े चूहों जैसा बिना पूंछ वाला जंगली जानवर, कस्तूरा मृग, लंगूर, घुरड़ आदि बगीचों में डेरा डालकर पेड़ों को नुकसान पहुंचाएंगे। वे लोग हर साल जितने नए पेड़ बगीचे में लगाते हैं, उतने ही पहले लगे पेड़ जंगली जानवर नष्ट कर देते हैं।
इस मुसीबत से छुटकारा दिलाने के लिए न सरकार के पास कोई योजना है और न ही इसका कोई हल सूझ रहा है। समस्या तब गंभीर होने लगी है जब क्षेत्र के कई गांवों के अधिकांश लोग जाड़ों में गांव छोड़कर उत्तरकाशी के आसपास अपने घरों में आते हैं।
कुछ दिन पूर्व जसपुर के पास बिना बारिश के जंगल में सूखी घास के आग पकड़ने से क्षेत्रीय लोगों की चिंता बढ़ा दी। सूखे की स्थिति में इस समय बड़े पैमाने पर बगीचों के आसपास फैली यह घास बारूद का काम करती है। एक चिंगारी से आग सुलगने की स्थिति में बगीचों के झुलसने का खतरा है।