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यमुना को मायके में ही घर नसीब नहीं

Sat, 25 Oct 2014 05:32 AM IST
Uttar Kashi
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बड़कोट(उत्तरकाशी)। अपने भक्तों के सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने वाली मां यमुना अपने मायके में ही बेघर है। शीतकालीन प्रवास के दौरान खरसाली में यमुना जी की उत्सव मूर्ति को पुराने जर्जर भवन में रखा जाता है। पांच सालों से पंच पंडा समिति खरसाली में यमुना जी का भव्य मंदिर बनाने का प्रयास कर रही है, लेकिन यह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इस बार भी शीतकालीन प्रवास के दौरान श्रद्धालु पुराने जीर्णशीर्ण भवन में ही यमुना जी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
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शनिवार 25 जुलाई को यमुनोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। मां यमुना की उत्सव मूर्ति को डोली यात्रा के साथ तीर्थ पुरोहितों के गांव खरसाली लाया जाएगा। यहां मूर्ति गांव के बीच बने पुराने जीर्ण-शीर्ण भवन में रखी जाएगी। इसी मंदिर में गांव की कुल देवी राजराजेश्वरी की मूर्ति भी रहती है। वर्षों से यही परंपरा चली आ रही है, इस बार शीतकालीन यात्रा के दौरान भी श्रद्धालु इसी जर्जर भवन में मां यमुना के दर्शन एवं पूजा-अर्चना करेंगे। हर साल यात्रा सीजन में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से लाखों रुपये का चढ़ावा यमुना जी को चढ़ाए जाने के बावजूद मायके में यमुना जी का मंदिर न बन पाना हैरान करने वाला है।
पांच साल पहले पंच पंडा समिति ने खरसाली में मां यमुना के भव्य मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया था। जमीन खरीद सहित निर्माण पर करीब 27 लाख रुपये खर्चने के बावजूद मंदिर का निर्माण अधर में लटका है। जानकारों का मानना है कि पंच पंडा समिति एवं यमुनोत्री मंदिर समिति मिलकर प्रयास करें तो श्रद्धालुओं से प्राप्त दानराशि से शीघ्र ही इस मंदिर को भव्य रूप में तैयार कराया जा सकता है। फिलहाल इस बार तो अपने मायके में मां यमुना को पुराने जर्जर भवन में ही निवास करना होगा।
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खरसाली में यमुना मंदिर का निर्माण ठेकेदार की लापरवाही के चलते अधर में लटका है। समिति के अधीन पुरानी धर्मशाला की आय से ही मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। अवशेष निर्माण के लिए सामग्री जमा कर ली गई है। जल्द ही मंदिर का काम पूरा कर अगले वर्ष से नए मंदिर में ही यमुना जी की मूर्ति को प्रतिष्ठित करने की व्यवस्था की जाएगी।
-घनश्याम प्रसाद उनियाल, सचिव, पंच पंडा समिति यमुनोत्री।

खरसाली में यमुना जी के मंदिर निर्माण के निर्णय में शुरुआत में ही चूक हुई। यदि मंदिर समिति इसका जिम्मा लेती तो अब तक भव्य मंदिर का निर्माण हो चुका होता। मंदिर के अवशेष कार्य को पूरा करने के लिए मंदिर समिति पंच पंडा समिति को आर्थिक सहयोग देगी, ताकि अगले वर्ष यमुना जी खरसाली में अपने मंदिर में ही निवास करें।
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-पुरुषोत्तम प्रसाद उनियाल, सचिव यमुनोत्री मंदिर समिति।
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