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आधे-अधूरे सुरक्षा कार्यों के भरोसे तटवर्ती आबादी

Thu, 03 Jul 2014 05:32 AM IST
Uttar Kashi
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उत्तरकाशी। मानसून आने के साथ ही जिले में नदियों की तटवर्ती आबादी की धड़कने भी तेज हो गई है। पिछले दो वर्षों की बाढ़ में भागीरथी-यमुना के तटबंध तबाह होने और असी गंगा आदि सहायक नदियों में जमा मलबे के कारण जिले की नदियों से लगी तटवर्ती बस्तियां संवेदनशील हो चुकी हैं। आबादी को सुरक्षा के लिए जिले में तीन सौ करोड़ से अधिक लागत के बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू तो हुए, लेकिन अभी सिर्फ 25 से 40 प्रतिशत ही कार्य हो पाए हैं। मनेरी, पोखू देवता आदि कई स्थानों पर तो अभी काम ही शुरू नहीं हुए। नदी तल ऊंचा होने से तटवर्ती बस्ती पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए प्रशासन ने जिला मुख्यालय के आसपास से कुछ मलबा तो हटवाया, लेकिन अपस्ट्रीम में जमा मलबे के अब पानी के साथ नीचे आने पर खतरा बरकरार है। पौने दो करोड़ रुपये लागत से कराया गया भागीरथी नदी का चैनलाइजेशन पहली बरसात में ही धुलने से नदी मनमाने ढंग से तटों को छूते हुए बह रही है, जिससे कटाव का खतरा बढ़ गया है।
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अगस्त 2012 की बाढ़ के बाद स्वीकृत 55 करोड़ के काम करीब 80 प्रतिशत हो चुके हैं। जबकि बीते साल के 94 करोड़ के काम अभी 40 प्रतिशत हुए हैं। बजट के अभाव में ठेकेदारों को काम करने में दिक्कत आ रही है। कुछ जगहों पर तो ठेकेदारों ने काम भी बंद कर दिया है।
पीएस पंवार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग उत्तरकाशी।

निगम जोशियाड़ा बैराज से तिलोथ पुल तक भागीरथी के दोनों ओर करीब 153 करोड़ लागत से बाढ़ सुरक्षा कार्य करा रहा है। अभी 25 से 30 फीसदी काम हुए हैं। सब कुछ ठीक रहा, तो इस बार जिला मुख्यालय क्षेत्र की तटवर्ती बस्ती में बाढ़ से नुकसान नहीं होगा।
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जेबी सिंह, डीजीएम सिविल जल विद्युत निगम।

आपदा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों को बीस सेक्टरों में बांट कर कर्मचारी तैनात किए गए हैं। आपदा की स्थिति में प्रभावितों को पास के सुरक्षित स्कूलों में आसरा देने की तैयारी कर ली गई है। सभी विभागों ने आपदा का एक्शन प्लान भी तैयार किया है।
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श्रीधर बाबू अद्दांकी, डीएम उत्तरकाशी।
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