उत्तरकाशी। आखिरकार गंगाघाटी के बाशिंदों को रवांल्टा समुदाय का मानते हुए उन्हें ओबीसी प्रमाणपत्र जारी करने का शासनादेश जारी हो ही गया। अब संपूर्ण भटवाड़ी तहसील, डुंडा के धनारी, गाजणा एवं बरसाली तथा चिन्यालीसौड़ की गमरी और बिष्ट पट्टी के निवासियों को ओबीसी प्रमाणपत्र जारी हो सकेंगे।
वर्ष 2004 में जिले की रवांई घाटी तथा डुंडा-चिन्यालीसौड़ तहसील के कुछ हिस्सों को ओबीसी घोषित करने के बाद से ही गंगा घाटी में भी मांग शुरू हो गई थी। कोर्ट कचहरी और तमाम आंदोलनों के बाद 18 अक्तूबर 2013 को राज्य की कैबिनेट ने गंगा घाटी के बाशिंदों को ओबीसी घोषित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी थी। इसके बाद से राज्य के विभिन्न हिस्सों में भी ओबीसी की मांग जोर पकड़ने लगी, जिससे गंगा घाटी का मामला अधर में लटकने के कयास लगाए जा रहे थे। आखिरकार 19 नवंबर को प्रमुख सचिव एस राजू ने शासनादेश जारी करते हुए उत्तरकाशी की गंगा घाटी के क्षेत्रों के बाशिंदों को ओबीसी प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दे दिए हैं। शासनादेश के अनुसार राजस्व अधिकारियों की जांच में रवांल्टा जौनपुरी समुदाय के चिह्निकरण के लक्षण और संकेत पाए जाने पर ही प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।
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गंगा घाटी की जनता के लंबे संघर्षों के बाद यह मांग पूरी हुई है। इससे निश्चित ही इस सीमांत क्षेत्र की जनता को लाभ मिलेगा। - सूरतराम नौटियाल, पूर्व उपाध्यक्ष चार धाम विकास परिषद।
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कांग्रेस ने क्षेत्र की जनता से वायदा किया था और इसे पूरा भी किया। 18 अक्तूबर को कैबिनेट में पास करने के एक माह बाद ही शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। इसके लिए क्षेत्र की जनता मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और उनके पुत्र साकेत बहुगुणा की आभारी है।
विजयपाल सजवाण, गंगोत्री विधायक।