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गंगोत्री-बदरीनाथ से निकाले 450 वाहन

Wed, 02 Oct 2013 05:39 AM IST
Uttar Kashi
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केस 1-
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सड़क खुलने पर अपनी इनोवा गाड़ी लेकर लौट रहे आगरा निवासी अशोक ने बताया कि वे 15 जून को तीर्थयात्रियों को गंगोत्री धाम की यात्रा पर लेकर आए थे। सड़क बंद होने पर गंगनानी में फंस गए थे। सड़क नहीं खुली तो गाड़ी यहीं छोड़ कर लौटना पड़ा। अब सड़क खुलने की सूचना मिलने पर गाड़ी लेने आया हूं। सड़क अब भी इतनी बदहाल है कि यहां दोबारा आने की हिम्मत नहीं है।

केस 2-
जून माह में रोटेशन व्यवस्था पर चार धाम यात्रा पर निकले ध्यान सिंह नेगी ने बताया कि 16 जून को सड़क बंद होने पर बस गंगनानी में ही छोड़कर यात्रियों के साथ लौटना पड़ा। तीन माह तक बिना गाड़ी के बेकार बैठे रहे। अब सड़क खुलने पर गाड़ी ले जा रहे हैं। गाड़ी मालिकों और ड्राइवरों की सुध नहीं ली। सड़क की स्थिति अब भी सुरक्षित आवाजाही लायक नहीं है।
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उत्तरकाशी। जून माह में आई आपदा के दौरान गंगोत्री धाम की ओर फंसे वाहनों के लौटने का सिलसिला जारी है। 19 सितंबर को लालढांग वाली बाधा हटने के बाद से अब तक ढाई सौ वाहन लौट चुके हैं। वाहन चालक दोबारा इस ओर आने से तौबा कर रहे हैं। अब भी चार दर्जन से अधिक वाहन गंगोत्री की ओर फंसे हैं। यमुनोत्री की ओर फंसे वाहन आपदा के कुछ दिनों बाद ही निकाल लिए गए थे।
16-17 जून की आपदा में यमुनोत्री एवं गंगोत्री राजमार्ग अवरुद्ध होने से सैकड़ों वाहन और हजारों तीर्थयात्री इन धामों और पड़ावों पर फंस गए थे। डेढ़ हफ्ते तक चले रेस्क्यू में सभी यात्री निकाल लिए गए, लेकिन वाहन वहीं फंसे रह गए थे। यमुनोत्री राजमार्ग पर मलबा हटाकर जून माह के अंत तक सभी वाहनों भी सुरक्षित निकाल लिए गए थे। अब 19 सितंबर को गंगोत्री हाईवे खुलने पर यहां फंसे वाहनों के लौटने का सिलसिला जारी है।
मनेरी थाने से प्राप्त सूचना के अनुसार अब तक गंगोत्री की ओर फंसे 250 वाहन निकल चुके हैं। अब भी करीब चार दर्जन वाहन झाला, धराली क्षेत्र में हैं। इनके मालिक अभी गाड़ियां लेने नहीं आए हैं। जिला मुख्यालय पर मोटर मैकेनिक का काम करने वाले धीरज ने बताया कि रोजाना गंगोत्री की ओर से 6-7 गाड़ियां ऐसी पहुंच रही हैं, जिनमें किसी की बैटरी निकाली हुई है तो किसी की टंकी टूटी है। तीन माह तक गाड़ी खड़ी रहने से कई गाड़ियों की बैटरी खराब हो गई है।

बदरीनाथ से वाहन निकालने के लिए लगी भीड़
गोपेश्वर। हाईवे खुलने से बदरीनाथ धाम में फंसे अपने वाहनों को निकालने के लिए तीर्थयात्रियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। यात्री अपने वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल के साथ धाम पहुंच रहे हैं। लामबगड़ से बैनाकुली तक सड़क का निर्माण सिंगल लेन किया गया है। आवाजाही होने से पैदा होने वाली जाम की स्थिति को देखते हुए बीआरओ ने चार दिनों तक सिर्फ बदरीनाथ से वाहनों की निकासी की व्यवस्था की है।
16/17 जून की जल प्रलय के बाद से बदरीनाथ धाम में करीब 650 वाहन फंसे थे। मंगलवार तक करीब दो सौ वाहनों की निकासी हो गई है। अपने वाहनों को लेने के लिए देश के कोने-कोने से तीर्थयात्री यहां पहुंचे हैं। राजस्थान निवासी भुवनेश चंद्र और दिवाकर का कहना है कि वे हाईवे के खुलने का इंतजार कर रहे थे। अब वाहन लेने यहां पहुंचे हैं। दिल्ली के पुरुषोत्तम तिवारी ने भी ऐसा ही कहा।

टायर भ्रष्ट होने से यात्री परेशान
गोपेश्वर। बदरीनाथ में अत्यधिक ठंड और तीन माह से वाहन के खडे़ रहने से वाहनों के टायर चलने की स्थिति में नहीं मिल रहे हैं। धाम में अपने वाहन लेने पहुंचे राजस्थान के अश्वनी गहलोत को ऐसी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बाद में वे जोशीमठ से मैकेनिक और टायर को लेकर बदरीनाथ पहुंचे। टायर लगाने के बाद ही वाहन अपने गंतव्य को रवाना हुआ।

इनका कहना है
अधिक समय तक वाहनों के एक ही स्थान पर खडे़ होने से इंजन ऑयल की चिकनाई खत्म हो जाती है। टायरों में क्रेक पड़ जाते हैं। हवा निकल जाती है। जिससे टायर खराब हो जाते हैं। जब वाहन को अधिक समय के बाद चलाया जाता है तो ऑयल को चेंज करना बेहद जरूरी है। अधिक समय से वाहन चालू हालत में न हो तो खडे़ वाहनों को कुछ देर तक स्टार्ट कर छोड़ देना चाहिए। - चंद्रकांत भट्ट, सहायक संभागीय निरीक्षक, पौड़ी।
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लामबगड़ में चट्टान से रुक-रुक कर पत्थर छिटक रहे हैं। मौसम ने साथ दिया तो चार दिनों के भीतर बदरीनाथ से सभी वाहनों की निकासी कर दी जाएगी। - कर्नल निलेश चंदाराना, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ।
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