उत्तरकाशी। गंगोत्री हाईवे दुरुस्त करने तथा बाढ़ सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के लिए कलक्ट्रेट में जनसंगठनों का क्रमिक धरना दूसरे दिन भी जारी रहा।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि जिले में यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे सिर्फ नाम के हाईवे रह गए हैं। 74 दिनों से गंगोत्री तथा 46 दिनों से यमुनोत्री हाईवे बंद है। जब ये खुले भी रहते हैं तो इन पर चलना जोखिम भरा होता है। करोड़ों का बजट खर्च करने पर भी इनकी हालत में सुधार नहीं हो रहा।
कहा कि पिछले साल अगस्त में आई बाढ़ के बाद समय पर सुरक्षा कार्य न कराने का खामियाजा इस बार नगर की तटवर्ती आबादी को भुगतना पड़ा। चेतावनी दी कि धरातल पर प्रभावी कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। इस मौके पर जयप्रकाश राणा, विजय बहादुर रावत, शैलेंद्र मटूड़ा, किशन सिंह पंवार, कमल किशोर जोशी, यशपाल पंवार, मेजर आरएस जमनाल, रवींद्र नौटियाल, केशर सिंह पंवार, हरि सिंह गुंसाई, महावीर रावत आदि मौजूद थे।
डीएम ने स्वीकारी ‘धीमी प्रगति’
उत्तरकाशी। डीएम डा.पंकज पांडे ने स्वीकारा कि गंगोत्री हाईवे पर यातायात बहाली की प्रगति काफी धीमी है। उन्होंने स्वयं मनेरी लालढांग तक हाईवे का निरीक्षण किया तो यहां अवरुद्ध हिस्सों में काम होता नहीं दिखा। डीएम ने कहा कि 31 अगस्त तक गंगोत्री तक हल्के वाहनों की आवाजाही शुरू करने का निर्णय हुआ था लेकिन इस दिशा में प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में बीआरओ को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है।