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बटर फेस्टिवल पर पड़ी आपदा की काली छाया

Mon, 15 Jul 2013 05:31 AM IST
Uttar Kashi
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उत्तरकाशी। आपदा की काली छाया गंगा घाटी के पौराणिक, सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सवों पर भी पड़ रही है। सड़क और संपर्क मार्ग बंद होने से दयारा बुग्याल में खेली जाने वाली दूध, मक्खन और दही की होली का आयोजन समिति ने टाल दिया था। बटर फेस्टिवल के नाम से विख्यात इस उत्सव में देश भर के सैलानी शामिल होते हैं। गंगा घाटी की संस्कृति देश-विदेश में अपनी अलग पहचान रखती है। वर्षभर में होने वाले कई थौल-मेलों और उत्सवों में यहां की संस्कृति की सतरंगी छठा देखने को मिलती है। इन उत्सवों में न केवल स्थानीय लोग बल्कि देश-विदेशों से भी सैलानी शिरकत करते हैं। इन सभी उत्सवों में बटर फेस्टिवल की अपनी अगल पहचान है। इस बार इस फेस्टिवल की तैयारी दयारा पर्यटन उत्सव समिति रैथल ने पूरी कर दी थी। इसके लिए बैनर, होर्डिंग व पोस्टर भी छाप दिए थे, लेकिन 16 व 17 जून को आई प्रलयकारी बाढ़ से गंगोत्री राजमार्ग व दयारा तक पहुंचने वाले पैदल मार्ग के जगह-जगह तबाह होने के कारण समिति ने यह उत्सव फिलहाल के लिए टाल दिया है। इस उत्सव में लोग पारंपरिक वस्त्र पहनकर रांसौं नृत्य व लोकगीतों के साथ दूध, मक्खन और दही की होली खेलते हैं।
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सेलुकू भी न पड़ जाए फीका

उत्तरकाशी। गंगा घाटी के टकनौर पट्टी के रैथल, गोरसाली, मुखबा, धराली सहित विभिन्न गांवाें में सितम्बर माह में मनाए जाने वाले सेलुकू उत्सव के फीका पड़ने के आसार है। इस उत्सव को बग्वाल के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें गांवों की विवाहित बेटियां अपने मायके आती है। उत्सव में भी बड़ी संख्या में देशी-विदेश से भी सैलानी शामिल होते हैं, लेकिन इस बार सितंबर माह तक भी गंगोत्री मार्ग खुलने के आसार नहीं है।

बटर फेस्टिवल की तैयारियां पूरी हो गई थी, लेकिन सड़क व संपक मार्ग बंद होने के कारण इसे फिलहाल टाल दिया है। यदि सितंबर माह तक गंगोत्री मार्ग खुल जाता है तो उत्सव को मनाने के लिए विचार किया जाएगा।
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मनोज राणा, अध्यक्ष दयारा पर्यटक विकास समिति
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