उत्तरकाशी। गंगोत्री राजमार्ग आपदा से बदहाल है। उपचार के लिए बजट न होने से इस वर्ष गंगोत्री धाम की तीर्थयात्रा में भी दिक्कतें आ सकती हैं। सामरिक महत्व के इस राजमार्ग के अनुरक्षण की जिम्मेदारी बीआरओ के पास है।
बीते साल अगस्त की आपदा में गंगोत्री राजमार्ग पर गंगोरी तथा स्वारी गाड के मोटर पुल बहने के साथ ही राजमार्ग का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था। हाईवे को यात्रा के ट्रैफिक लायक तैयार करने के लिए बीआरओ ने 40 लाख रुपये की मांग की, लेकिन उन्हें एक पैसा नहीं मिला। बीआरओ के वार्षिक कार्ययोजना के 100 करोड़ के बजट को भी स्वीकृति नहीं मिल पाई है। फिलहाल बीआरओ डिफेंस के मद से किसी तरह इस सड़क पर यातायात बहाल रखने की कोशिश में है। लेकिन धरासू नालूपाणी, सिंगोटी, गंगोरी, मनेरी, भाटुकासौड़, विशनपुर, औंगी, लाटा से मल्ला, भटवाड़ी, चड़ेती, स्वारीगाड तथा सुनगर से सुक्की तक जर्जर पड़ा राजमार्ग का बड़ा हिस्सा यात्रा के ट्रैफिक का बोझ संभालने की स्थिति में नहीं है।
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मंडलायुक्त 16 जनवरी को देहरादून में यात्रा की तैयारी बैठक कर चुके हैं। अब बीआरओ के साथ शासन स्तर पर उच्च स्तरीय बैठक होनी है। यात्रा शुरू होने से पहले हर हाल में गंगोत्री राजमार्ग को दुरुस्त कराया जाना है।- ललित मोहन रयाल, प्रभारी डीएम उत्तरकाशी।
आपदा में ध्वस्त सड़क को दुरुस्त करने के लिए 40 करोड़ की मांग की गई थी, लेकिन एक पैसा नहीं मिला। फिलहाल डिफेंस के 12 करोड़ के बजट से यातायात बहाल रखने की कोशिश की जा रही है। लेकिन ऐसे में यात्रा सीजन में यहां बड़े वाहनों की आवाजाही मुश्किल है। हल्के वाहन भी अपने रिस्क पर ही चल पाएंगे।- चंद्रशेखर, कमांडर, बीआरओ टास्क फोर्स।
यात्रा सीजन से पहले यमुनोत्री और गंगोत्री राजमार्ग दुरुस्त नहीं कराए गए तो यात्रा चौपट होनी तय है। इससे यात्रा पर टिकी लोगों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। सड़क दुरुस्त नहीं हुई तो होटल मालिक अपने प्रतिष्ठानों पर ताले लगाकर चाबियां डीएम को सौंप देंगे।- अजय पुरी अध्यक्ष होटल एसोसिएशन