जिलेभर में आपदा से क्षतिग्रस्त सिंचाई नहरों का पुनर्निर्माण व मरम्मत नहीं होने से सैकड़ों हेक्टेयर सिंचित भूमि बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है। जिससे किसान चार साल से धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। सिंचाई के लिए बरसात के पानी पर निर्भर किसानों के फसल उत्पादन में इस बार भारी कमी आई है।
सरकार एक ओर कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है, वहीं सिंचाई नहरों के पुनर्निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। इससे कई हेक्टेयर उपजाऊ भूमि बेकार साबित हो रही है। आपदा से जिलेभर में सिंचाई विभाग की 138 सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त हैं। जिनके मरम्मत के लिए विभाग को अभी तक शासन की ओर से बजट उपलब्ध नहीं हो पाया।
ऐसे में जनपद के किसानों की 577.40 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर है। तीन सिंचाई लिफ्ट स्कीम भी मरम्मत नहीं होने से बंद पड़ी हैं। सिंचाई नहरों के पुनर्निर्माण को विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बजट मिलने पर ही सिंचाई नहरों को दुरुस्त किया जाएगा।
बाड़ाहाट-गंगोरी सिंचाई नहर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 6 किमी लंबी गंगोरी नहर वर्ष 2012 की भीषण आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई थी, लेकिन बजट अभाव के कारण चार साल बीतने पर भी विभाग नहर को दुरुस्त नहीं कर पाया। सिंचाई नहर से क्षेत्र के लक्षेश्वर, बाड़ाहाट, गंगोरी, उत्तरौं आदि गांवों के ग्रामीणों की 40 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सिंचित होती थी। चार सालों से क्षेत्र के ग्रामीण खेतों की सिंचाई के लिए बरसात के पानी पर निर्भर हैं।
बरसात का पानी सिंचाई के लिए पर्याप्त नहीं होने के कारण इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ा है। काश्तकार हरीश डंगवाल, ब्रह्मानंद नौटियाल, राजी देवी आदि ने बताया कि पर्याप्त सिंचाई के अभाव में इस बार फसल बेहद कम हुई है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पीएस पंवार का कहना है कि विभागीय स्तर से काफी समय पहले सिंचाई नहरों की मरम्मत के लिए शासन को 848.67 लाख का प्राक्कलन भेजा है, जबकि लिफ्ट स्कीम के लिए अलग से 25 लाख का प्रस्ताव भेजा गया है। पैसा मिलते ही सिंचाई नहरों को दुरुस्त करने का कार्य शुरू किया जाएगा।