बेमौसम बर्फबारी और ओलावृष्टि से जिले में सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। उद्यान विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचकर क्षति का आकलन शुरू कर दिया है। शुरूआती सर्वे में मौसम की मार से सेब की फसल को 35 प्रतिशत से अधिक नुकसान बताया जा रहा है।
जनपद के उपला टकनौर, स्योरी, आराकोट बंगाण, फतेपर्वत आदि क्षेत्रों में ग्रामीणों की आजीविका सेब बागवानी पर टिकी है। आजकल सेब का फ्लावरिंग एवं परागण सीजन चल रहा है। बीते हफ्ते जिले के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि के साथ ही उपला टकनौर, गीठ एवं मोरी क्षेत्र के ऊंचाई वाले गांवों में भारी बर्फबारी होने से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा। बगीचों में सेब के पेड़ों से फूल और पत्तियां ही नहीं टहनियां तक टूट कर गिर गईं। ऊंचाई वाले बगीचों में बर्फ के बोझ से कई पेड़ जड़ समेत उखड़ गए या उनके तने फट गए।
धराली निवासी महेश पंवार ने बताया कि उनका 50 पेड़ों का सेब का बगीचा पूरी तरह बर्बाद हो गया। उपला टकनौर क्षेत्र में डेढ़ फीट तक बर्फ गिरी है। सेब के नाजुक पेड़ बर्फ का बोझ नहीं संभाल पाए। सुक्की निवासी मोहन सिंह राणा ने कहा कि सेब की फसल का नुकसान तो बीमा में कवर है, लेकिन पेड़ क्षतिग्रस्त होने पर किसानों के नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती। उन्होंने सरकार से सेब काश्तकारों को हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें क्षतिपूर्ति देने की मांग की है।
15 दिन बाद पता चलेगा सेब का नुकसान
जिला उद्यान अधिकारी डा. रजनीश सिंह ने बताया कि ऊंचाई वाले बगीचों में बर्फ अधिक पड़ने से सेब के पेड़ क्षतिग्रस्त हुए हैं। आजकल सेब में परागण का समय है। ओलावृष्टि और बर्फबारी से पहले यदि फूलों में परागण क्रिया हो गई होगी, तो फ्रूट सेटिंग शुरू हो जाएगी। यदि परागण क्रिया बाधित हुई होगी, तो फल नहीं बनेंगे। ऐसे में मौसम की बेरुखी से हुए वास्तविक नुकसान का पता 15 दिन बाद ही लग पाएगा।