जिलेभर के अधिकांश प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पेयजल के लिए शासन से बजट नहीं मिल रहा है। जिले के 225 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में लंबे समय से पेयजल की किल्लत है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत जिले के प्रत्येक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था होनी जरूरी है, लेकिन शासन-प्रशासन की लापरवाही के कारण स्कूलों में पेयजल सिस्टम दम तोड़ रहा है। जिले के भटवाड़ी ब्लाक में 9, चिन्यालीसौड़ में 20, नौगांव में 16, मोरी में 20, पुरोला में छह और डुंडा में तीन सहित कुल 74 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए पीने का पानी नहीं है। 151 प्राथमिक विद्यालय पेयजल विहीन हैं। विभाग ने जिला योजना में पेयजल विहीन सभी स्कूलों में पेयजल के लिए बजट मांगा है।
कब से नहीं मिला बजट
वर्ष 2002-03 में विभाग को डीपीईपी मद से 400 स्कूलों के लिए 20 हजार रुपये प्रति स्कूल के हिसाब से पेयजल बजट मिला था, जबकि वर्ष 2005-06 में एसएसए के अंतर्गत 183 स्कूलों के लिए बजट मिला। लगभग 100 स्कूल पीएमजीएसवाई योजना से फीड हुए। इसके बाद मरम्मत व आपदा से क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं के लिए कोई बजट नहीं मिला।
स्कूलों में क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं की मरम्मत के लिए जिला योजना से बजट मांगा गया है। एसएसए से फिलहाल बिजली, पानी, शौचालय आदि के लिए बजट मिलना बंद हो गया है।
धर्म सिंह रावत, जिला शिक्षाधिकारी बेसिक।