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गोमुख-तपोवन जाने के लिए करना होगा अभी इंतजार

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उत्तरकाशी। प्रकृति प्रेमियों व रोमांच के शौकीनों को गोमुख-तपोवन क्षेत्र का लुत्फ उठाने के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ेगा। इस वर्ष सर्दियों में हुई भारी बर्फबारी के कारण गंगोत्री-गोमुख ट्रेक जगह-जगह ग्लेशियरों से पटा हुआ है। साथ ही अब गर्मी बढ़ने पर यहां हिमस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। इन हालात को देखते हुए पार्क प्रशासन ने एक बार फिर 20 अप्रैल को ट्रेक की रेकी करने के बाद ही पर्यटकों को गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देने का निर्णय लिया है।
ट्रेकिंग व माउंटेनियरिंग एसोसिएशन की मांग पर पार्क प्रशासन ने इस वर्ष गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट 15 दिन पहले एक अप्रैल को खोलने का निर्णय लिया था। पार्क क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही शुरू करने से पूर्व प्रशासन ने वन विभाग, एसडीआरएफ व ट्रेकिंग कारोबारियों की संयुक्त टीम को क्षेत्र की रेकी करने के लिए भेजा। बीते चार अप्रैल को 15 सदस्यीय दल गंगोत्री से तपोवन के लिए रवाना हुआ, लेकिन ट्रेक रूट पर जगह-जगह आए ग्लेशियरों और एवलांच के खतरे को देखते हुए दल को चीड़वासा से ही लौटना पड़ा।
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दल में शामिल ट्रेकिंग एसोसिएशन के सचिव मनोज रावत ने बताया कि कनखू बैरियर से चीड़वासा तक आठ किमी लंबे ट्रेक में ही करीब आधा दर्जन से ज्यादा ग्लेशियर आए हैं, जिनमें से देवढांग व भांगुलवासा में आए ग्लेश्यिरों को पार करना बड़ा जोखिमभरा है। मौजूदा हालात को देखते हुए चीड़वासा से आगे बढ़ना खासा जोखिम भरा है। ऐसे में टीम ने पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल गोमुख-तपोवन क्षेत्र में आवाजाही शुरू नहीं करने का निर्णय लिया है। अगर मौसम सही रहा तो संभवत: 20 तारीख तक पार्क क्षेत्र में अनुभवी ट्रेकरों व पर्वतारोहियों की आवाजाही शुरू हो सकती है।
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इस वर्ष हुई भारी बर्फबारी के कारण कनखु बैरियर से चीड़वासा तक के रास्ते में ही करीब 8 से 10 छोटे बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं। चीड़वासा से आगे ट्रेकिंग की अभी स्थिति नहीं है। 20 अप्रैल को एक बार फिर ट्रेक की रेकी की जाएगी। इसके बाद ही पर्यटकों की आवाजाही शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
प्रताप पंवार, वन क्षेत्राधिकारी गंगोत्री नेशनल पार्क।
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