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जिले में नहीं बनी पर्यटन की ठोस नीति

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उत्तरकाशी। अपार संभावनाओं और तमाम राजनीतिक वायदों एवं दावों के बावजूद जिले में पर्यटन को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल पाया है। अलग राज्य गठन के दो दशक बाद भी पर्यटन विकास के लिए ठोस नीति नहीं बनने के कारण जिले में पर्यटन यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम की यात्रा तक ही सिमट कर रह गया है। शीतकालीन पर्यटन, ईको टूरिज्म, साहसिक खेल जैसी गतिविधियां सिर्फ सरकारी घोषणाओं तक ही सीमित है। वन कानूनों की बंदिशों और बाहरी एजेंसियों के दबदबे ने भी पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचाया है।
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हर साल देश-विदेश से लगभग आठ लाख पर्यटक पहुंचते हैं। इसमें अधिकांश यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम की यात्रा पर पहुंचते हैं। पर्वतारोहण, ट्रैकिंग एवं साहसिक पर्यटन के लिए पहुंचने वालों की तादात महज 10 हजार के आसपास है। अगर यात्रा के दौरान विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन व उत्पादों की मार्केटिंग की जाए, तो तीर्थयात्री जिले की आर्थिकी को बढ़ावा देने में अधिक योगदान कर सकते हैं।
शासन प्रशासन द्वारा यमुनोत्री धाम की हमेशा से उपेक्षा की गई है। तमाम दावों के बावजूद धाम के पुनर्निर्माण व रोपवे लगाने की मांग को पूरा नहीं किया गया है। हालांकि नई सरकार बनने के बाद हालात में सुधार आने की उम्मीद है।
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-बागेश्वर उनियाल, प्रवक्ता, यमुनोत्री मंदिर समिति।
पर्वतारोहण व ट्रैकिंग उद्योग पूरी तरह प्रकृति की देन व स्थानीय कारोबारियों की मेहनत के बलबूते चल रहा है। अगर सरकार साहसिक पर्यटन को लेकर ठोस नीति बनाए तो हालात में कुछ सुधार हो सकता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को भी इस संबंध में दूरदर्शिता दिखानी होगी।
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-विष्णु सेमवाल, एवरेस्टर एवं ट्रैकिंग कारोबारी।
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