उत्तरकाशी। पांच साल पहले सांसद आदर्श ग्राम चुने गए बौन गांव में आज भी हालात नहीं बदले हैं। यूं तो सरकारी फाइलों में गांव के लिए स्वीकृत करीब पौने चार करोड़ की 59 योजनाओं में से 56 पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि गांव की स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण सड़क, मोबाइल टावर की लंबे समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन हल नहीं हो पा रही है।
बौन गांव को अक्तूबर 2014 में केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत सांसद आदर्श ग्राम चुना गया था। इसके तहत गांव के लिए 3.79 करोड़ की 59 योजनाएं स्वीकृत की गई थी, जिनमें से 56 योजनाओं को सरकारी विभागों द्वारा पूर्ण करने का दावा भी किया जा रहा है। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि अधिकांश योजनाएं फाइलों में ही पूरी हुई है। गांव के केसर सजवाण, पुलम सिंह, दिपेंद्र सिंह, उत्तम सिंह ने बताया कि आदर्श ग्राम के तहत गांव में कई छोटे बड़े विकास कार्य हुए हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते इनमें से अधिकांश का ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। आंगनबाड़ी भवन के हस्तांतरण की कार्रवाई पूरी नहीं होने तथा पुस्तकालय में किताबें नहीं होने के कारण दोनों भवन शोपीस बने हुए हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सालय में लंबे समय से चिकित्सक नहीं होने के कारण सारी व्यवस्था एक फार्मासिस्ट के भरोसे है। ग्रामीण सौड़-मंदारा मोटर मार्ग निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी है। थी।
सांसद आदर्श ग्राम के तहत गांव में अधिकांश योजनाओं को पूरा कर लिया गया है, जबकि कई योजनाओं पर अभी कार्य चल रहा है। हालांकि सौड़-मंदारा मोटर मार्ग व बीएसएनएल टावर जैसी कुछ योजनाएं तकनीकी दिक्कतों के चलते धरातल पर नहीं उतर पायी हैं। इसके लिए संबंधित विभागों में पैरवी की जा रही है। -बलदेव सिंह पडियार, ग्राम प्रधान, बौन गांव।