उत्तरकाशी। पहाड़ के गांवों में अब हाइड्रोपोनिक तकनीक से कम समय एवं कम लागत में आसानी से पशुओं के लिए हरा चारा तैयार किया जा सकेगा। पशुपालन विभाग ने जनपद में एकीकृत आजीविका परियोजना की मदद से जिले में तीन परीक्षण यूनिट स्थापित कर इसका प्रयोग शुरू कर दिया है।
डीएम डा. आशीष चौहान के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने जिले में हाइड्रोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है। मांडों गांव में यूनिट लगाई गई, जिसका शुभारंभ सीडीओ प्रशांत आर्य ने किया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. प्रलयंकर नाथ ने बताया कि तकनीकी से ग्रामीणों को महज 10 से 12 दिन के भीतर चार रुपये प्रति किलो से पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध हो पाएगा। प्रथम चरण में एकीकृत आजीविका परियोजना के सहयोग से जिले में मांडों, मुस्टिकसौड़ एवं गमदिड़ गांव में यूनिट स्थापित की गई है। इसकी यूनिट महज 22 हजार रुपये में आती है, इसे पशुपालन स्वयं भी खरीद कर घरों में स्थापित कर सकते हैं। यूनिट स्थापित करने पहुंचे नंबर वन इरीगेशन सिस्टम इरोड़ तमिलनाडु के गोपाल ने बताया कि यूनिट में बिना मिट्टी के पानी की ड्रिप सिंचाई के माध्यम से बीजों को अंकुरित किया जाता है। इसमें साढ़े तीन किलो बीज को अंकुरित कर महज 10 से 12 दिन के भीतर 12 से 14 किलो हरा चारा तैयार हो जाता है। इस मौके पर गांव की प्रधान रजनी भट्ट, डा. हिमांशु पांडेय, डा. शिवानंद पाठक, डा. धर्मेंद्र नाथ, डा. अंकित कुमार, जयवीर सिंह, सुरेंद्र राणा, लोकेंद्र जोशी आदि मौजूद रहे।