गढ़वाल। पहले से गिरी बर्फ पिघली नहीं कि फिर हिमपात होने से ऊंचाई वाले गांवों में रह रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। बर्फ से पटे गांवों में जहां बिजली, पानी व संचार की समस्या पहले से ही थी, वहीं अब रसद, चारापत्ती का संकट भी पैदा होने लगा है। कुछ सालों से बर्फबारी कम होने पर लोगों ने कुछ ही दिन का राशन रखा होता था, लेकिन इस बार 21 जनवरी के बाद कई बार हिमपात होने से बर्फ पिघल ही नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों गांवों में ही कैद होकर रह गए हैं और एकत्र किया हुआ रसद व चारापत्ती भी समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। अब यदि ओर बर्फबार होती है, तो गांवों में राशन का संकट गहरा जाएगा। अभी भी उत्तरकाशी में सौ से अधिक गांव, चमोली में 50 व रुद्रप्रयाग में 20 गांव बर्फ से ढके हैं।
उत्तरकाशी। करीब दो दशक बाद इस बार जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में जमकर हुई बर्फबारी अब आफत बनती जा रही है। जिले में करीब सौ गांव बर्फ में कैद हैं। बीती 21 जनवरी से अलग-थलग पड़े बर्फ में कैद गांवों में रह रहे ग्रामीणों का राशन भी खत्म होने को है।
इस बार सर्दियों में बीते साल नवंबर से ही बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो गया था। बीती 21 जनवरी से तो जिले में निरंतर बर्फबारी का दौर जारी है। यही कारण है कि ऊंचाई वाली सड़कें अवरुद्ध होने से जिले के सौ से अधिक गांव अलग-थलग पड़े हैं। बीते दिनों की बर्फबारी के बाद से उपला टकनौर, यमुनोत्री घाटी, गोविंद वन्य जीव विहार क्षेत्र, पुरोला ब्लाक के गांव बर्फ से ढके हैं। गांवों की सड़क व पैदल मार्ग पर चलना मुश्किल हो गया है।
सुक्की निवासी मोहन सिंह राणा, हर्षिल के डा. नागेंद्र रावत, जखोल मोरी के राजपाल रावत, सांकरी के चैन सिंह रावत, खरसाली के रणवीर राणा का कहना है कि खेती-बागवानी, जलस्रोत और पर्यटन के लिहाज से तो इस बार हो रही बर्फबारी वरदान है, लेकिन यह सिलसिला लंबा खिंचने से अब ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ने लगी हैं। बीते सालों में कम बर्फबारी होने के कारण अब ग्रामीण ज्यादा खाद्यान्न का भंडारण नहीं करते। करीब एक माह से बर्फ में कैद ग्रामीणों का राशन अब खत्म होने लगा है। यदि शीघ्र बर्फ से अवरुद्ध रास्ते सुचारू नहीं किए गए, तो ग्रामीणों के समक्ष खाद्यान्न का संकट खड़ा हो जाएगा। मोरी प्रखंड के गोविंद वन्य जीव विहार क्षेत्र में पड़ने वाले 42 गांव तथा उपला टकनौर के आठ गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप है। यमुनोत्री क्षेत्र के गांवों में पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से पानी का संकट बना हुआ है। संबंधित क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र बर्फबारी में ध्वस्त हुई व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।
बर्फीली हवा चलने से ग्रामीण परेशान
गोपेश्वर/देवाल। जिले के 50 से अधिक गांव अभी भी बर्फ के आगोश में हैं। घाट विकास खंड के सितेल, वादुक, गुलाड़ी, बूरा, घूनी, पडेरगांव में अभी भी बर्फ जमी हुई है। यहां पैदल रास्तों में भी बर्फ जमी होने से ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतें आ रही हैं। शनिवार को सुबह से ही चटख धूप खिलने से निचले क्षेत्र के कई गांवों की बर्फ पिघल गई है, लेकिन सुबह और शाम को बर्फीली हवाएं चलने से ग्रामीणों को दिक्कत हो रही है। रामणी गांव के सूरज पंवार का कहना है कि क्षेत्र में अभी भी करीब दो फीट तक बर्फ जमी हुई है। वहीं, देवाल ब्लाक के 10 से अधिक गांव बर्फ से ढक गए हैं। यही नहीं लोहाजंग-वाण मोटर मार्ग पर बर्फबारी केेे कारण वाहनों की आवाजाही बंद पड़ी है। बर्फबारी से अधिकांश गांवों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। गांवों को आपस में जोड़ने वाले पैदल मार्ग बंद पड़े हैं, जिससे इन गांवों का आपस में संपर्क कट गया है। वहीं बगजी, ब्रह्मताल बुग्याल में तीन से चार फीट बर्फ पड़ी है। वाण के हीरा बुग्याली ने बताया कि भारी हिमपात के कारण लोहाजंग-वाण मोटर मार्ग पर शनिवार को दिनभर यातायात बंद रहा।
गांवों में बिजली, पानी संचार सेवा बदहाल
रुद्रप्रयाग। बर्फबारी से जनपद के ऊखीमठ, जखोली और अगस्त्यमुनि ब्लाक के 20 से अधिक गांव व्यापक रूप से प्रभावित हैं। इन गांवों में अब भी एक से तीन फीट तक बर्फ है। ऊखीमठ तहसील के चौमासी, चिलौंड, जाल तल्ला व मल्ला, ब्यूंखी, गौंडार, रांसी, तोषी, त्रियुगीनारायण, सारी, पेेंज, करोखी आदि गांव बर्फबारी से ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों के सामने मवेशियों के चारापत्ती जुटाना मुश्किल हो गया है। वहीं पेयजल लाइनें जम गई है, जिससे लोग बर्फ पिघलाकर पानी पी रहे हैं। इधर, जखोली के पालाकुराली, धनकुराली, चिरबटिया, बुढ़ना आदि गांव भी बर्फ से ढके हैं। स्थानीय मुलायम सिंह तिंदोरी, संदीप भट्ट, ओम प्रकाश भट्ट, रामरतन पंवार, जितेंद्र नैथानी, राय सिंह नेगी, सुमन नेगी, शशि देवी का कहना है कि बीते तीन सप्ताह में गांवों में चार बार बर्फबारी हो चुकी है, जिससे खेतीबाड़ी, साग-सब्जी पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। बिजली, पानी, संचार सेवा भी बदहाल पड़ी हुई है। रास्तों पर बर्फ जमी होने से सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है।