पुरोला (उत्तरकाशी)। नैटवाड़ बाजार, गैंचवाणगांव एवं थातरू बाजार के ग्रामीण यहां भूधंसाव सक्रिय होने व कई भवनों में दरारें आने से भयभीत हैं। ग्रामीणों ने इसके लिए नैटवाड़-मोरीजल विद्युत परियोजना निर्माण के दौरान भारी विस्फोटकों के उपयोग को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मुख्यमंत्री एवं डीएम को ज्ञापन प्रेषित कर शीघ्र ब्लास्टिंग पर रोक लगाने व भूधंसाव से हुई क्षति की भरपाई करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री एवं डीएम को प्रेषित ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि सतलुज जल विद्युत निगम द्वारा क्षेत्र में 60 मेगावाट की मोरी-नैटवाड़ जल विद्युत परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है। जेपी कंपनी द्वारा परियोजना का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें चट्टानों को काटकर सुरंग बनाने के लिए भारी विस्फोटकों का प्रयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना निर्माण के लिए रोज हो रहे भारी धमाकों से क्षेत्र में भूधंसाव सक्रिय हो गया है। उन्होंने शीघ्र ब्लास्टिंग पर रोक नहीं लगाए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। ज्ञापन भेजने वालों में रोजी सिंह सौंदाण, जगमोहन सिंह, राजेंद्र थपलियाल, भगवान सिंह रांगड़, सुखमाल जैन, पूर्णानंद कोठारी, गिरीश रांगड़ आदि शामिल हैं। वहीं, परियोजना निर्माण में लगी जेपी कंपनी के प्रबंधक हरदेव सिंह राठौर का कहना है कि नैटवाड़ बाजार क्षेत्र कई सालों से भूस्खलन एवं धंसाव की चपेट में है। परियोजना निर्माण में हो रही ब्लास्टिंग को लेकर रुड़की के भूगर्भ वैज्ञानिक भी निरीक्षण कर चुके हैं। उनकी रिपोर्ट में ब्लास्टिंग मानकों के अनुरूप पाई गई है। भवनों में आई दरारों का परियोजना निर्माण से कोई संबंध नहीं है।