उत्तरकाशी। कई सालों बाद सर्दियों में मौसम का बदला रुख ग्लेशियरों की सेहत और भूजल स्रोतों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। बीते साल अक्तूबर अंतिम सप्ताह से अभी तक जनपद के ऊंचाई वाले इलाकों में दस बार बर्फबारी हो चुकी है, जिससे बीते सालों में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों को संजीवनी मिलने की उम्मीद है। पर्यावरण के जानकार मौसम में आए इस बदलाव को हिमालय एवं गंगा के लिए वरदान मान रहे हैं।
बीते सालों में गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी में आई कमी और ग्लोबल वार्मिंग आदि कारणों से ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेजी से बढ़ रही थी। गंगोत्री ग्लेशियर को समृद्ध करने वाले कई छोटे ग्लेशियर तो लुप्त हो गए थे। बरसात में भोजवासा एवं गोमुख क्षेत्र तक बारिश होने के कारण ग्लेशियरों को खासा नुकसान पहुंच रहा था। गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम समेत समुद्र सतह से तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में नवंबर से ही बर्फ की सफेद चादर बिछी हुई है। धामों में इस समय तीन से चार फीट तक बर्फ जमा है।
जानकारों का कहना है कि सर्दियों में कई दौर की बर्फबारी से एक के ऊपर एक तह जमने से बर्फ ठोस बर्फ का रूप लेती है, जो तापमान बढ़ने पर भी धीमी गति से पिघलती है। अभी सर्दियों का मौसम मार्च तक चलेगा। इस बीच पुन: बर्फबारी होने व मौसम खुलने पर भी पाला गिरने से ग्लेशियरों की सेहत सुधरेगी। इसके साथ ही बर्फ का पानी जमीन में रिस कर भूजल स्रोतों को रिचार्ज करेगा।