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सड़क के लिए पोखरीवासियों का इंतजार नहीं हुआ खत्म

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उत्तरकाशी। 15 साल के इंतजार और 364 के धरने के बावजूद पोखरी गांव के बाशिंदों की सड़क की मांग पूरी नहीं हो सकी है। दशकों बाद भी सड़क निर्माण नहीं होने पर ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ ही तथाकथित पर्यावरण प्रेमियों को भी जिम्मेदार ठहराया है।
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निम बैंड-पोखरी मोटर मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर पोखरी गांव के ग्रामीणों द्वारा कलक्ट्रेट में दिए जा रहे धरने को मंगलवार को एक साल पूरा हो गया, लेकिन सरकारी तंत्र की उदासीनता व कोर्ट केस के जाल में फंसकर ग्रामीणों की मांग अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। पोखरी के बलवीर कैंतुरा ने कहा कि वर्ष 2004 में निम बैंड से पोखरी गांव तक के लिए 800 मीटर सड़क स्वीकृत की गई थी, लेकिन तथाकथित पर्यावरण प्रेमियों के विरोध व प्रशासन की लापरवाही के चलते आज तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। हालांकि हाईकोर्ट के बाद अब एनजीटी ने भी इस संबंध में विरोधी पक्ष द्वारा दायर याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। इससे सड़क निर्माण के आड़े आ रहे सभी विवाद समाप्त हो गए हैं, लेकिन तय समय के भीतर सड़क निर्माण नहीं होने के कारण पर्यावरण मंत्रालय ने वन भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति को निरस्त कर दिया है। सड़क स्वीकृति के बाद से ही मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में वन भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति को निरस्त करना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की आड़ में गांव का विकास प्रभावित कर रहे लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज करने की चेतावनी दी है। ज्ञापन में गंगा सिंह, बचन सिंह, शीशपाल कैंतुरा, धरम सिंह, नत्थी सिंह, केशर सिंह आदि ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।
वहीं, ग्रीन चिपको डांग सत्याग्रह आंदोलन के सदस्य अभिषेक जगूड़ी ने बताया कि एनजीटी ने सड़क निर्माण पर रोक लगा दी है। एनजीटी के अनुसार निम बैंड-पोखरी सड़क के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने निरस्त कर दिया है। ऐसे में वहां सड़क नहीं बनाई जा सकती है, लेकिन अगर सरकार सड़क निर्माण के लिए पुन: स्वीकृति देती है तो डांग के ग्रामीण न्यायालय की शरण में जाएंगे।
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