उत्तरकाशी। माघ मेला ‘बाड़ाहाट कु थौलु’ के पांचवें दिन शुक्रवार को मेला मंच पर जूनियर हाईस्कूलों के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें सुमन ग्रामर स्कूल, गोस्वामी गणेश दत्त विद्या मंदिर, आद्य शंकराचार्य शिक्षण संस्थान, भागीरथी चिल्ड्रन एकेडमी, ब्राइट एजुकेशन एकेडमी व ऋषिराम शिक्षण संस्थान आदि विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने नृत्य संगीत के माध्यम से लोक संस्कृति व देशभक्ति की मनमोहक झलक पेश की।
मसीह दिलासा स्कूल के छात्र-छात्राओं ने कूड़ा निस्तारण व पर्यावरण संरक्षण विषय पर नृत्य नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने प्लास्टिक कचरा, ग्लोबल वार्मिंग व प्रदूषण आदि कारणों से प्रभावित हो रहे पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया। स्कूली बच्चों के कार्यक्रमों के बाद थत्यूड़ व रौतू की बेली क्षेत्र के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मनोरंजन किया। इसके बाद शांति दूत प्रेम रावत के शांति व प्रेम के संदेशों पर आधारित डाक्यूमेंट्री दिखाई गई। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा, एसओ महादेव उनियाल सहित जिला पंचायत सदस्य कुलदीप बिष्ट, मंगला राणा, संतोषी सजवाण, पवन नौटियाल और हर्ष अग्निहोत्री आदि मौजूद रहे। मंच संचालन शिवरतन रावत ने किया।
मेले में उमड़े मेलार्थी
उत्तरकाशी। दिन बीतने के साथ माघ मेला बाड़ाहाट कु थौलु की रौनक बढ़ने लगी है। शुक्रवार को डीएम की ओर से मेले की छुट्टी घोषित किए जाने से माघ मेले में मेलार्थियों की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान गंगोत्री हाईवे और जोशियाड़ा क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्थित करने में पुलिस के जवानों को मशक्कत करनी पड़ी।
दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे मेलार्थियों ने मेला परिसर में जमकर खरीददारी की और झूले-चर्खी, मेला मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाया। मेला परिसर में लगी दुकानों पर खरीददारी के लिए भारी भीड़ उमड़ने से व्यापारियों के चेहरे खिल गए। वहीं मेला परिसर के एक हिस्से में मेला आयोजन से पूर्व करीब दो माह तक कूड़ा डंप रहने के कारण यहां अब भी कूड़े की गंध की समस्या बनी हुई है। हालांकि जिला पंचायत की ओर से ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया गया है।
देव डोलियों के मिलन के साथ संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान
उत्तरकाशी। पौराणिक बाड़ाहाट कुु थौलु के तहत शुक्रवार को चमाला की चौंरी पर देव डोलियों के मिलन ने क्षेत्र की अलौकिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। बाड़ागड्डी के हरिमहाराज, खंडद्वारी देवी, पुंड्यारी देवी, नाग देवता, हूण देवता आदि देवी-देवताओं की डोली, ढोल एवं निशानों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण चमाला की चौंरी पहुंचे। यहां मेलार्थी देव डोलियों के मिलन के अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। ग्रामीणों ने देवी-देवताओं की स्तुति एवं पूजा कर उनसे आशीर्वाद लिया। देवताओं के समक्ष अपनी समस्याएं रखकर उनका समाधान जाना। इसके साथ ही चार दिनों से चल रहे बाड़ाहाट कु थौलु के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो गए।