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जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे ग्रामीण

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नौगांव (उत्तरकाशी)। आजादी को सात दशक बीते लेकिन थली गांव के ग्रामीणों को एक पुल नसीब नहीं हुआ। आज भी ग्रामीण जान जोखिम में डालकर कमल नदी पार कर आवाजाही करने को मजबूर हैं। विधायक एवं सांसद तक गुहार लगा चुके ग्रामीण अब इन खतरों को नियति मान कर गुजर बसर करने को मजबूर हैं।
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सड़क से करीब पांच किमी पैदल दूरी पर बसे नौगांव के थली गांव तक पहुंचने का रास्ता दुर्गम है, जिससे अधिकांश परिवार कमल नदी के निकट साड़ा तोक में निवास करते हैं। यहां सिंचित खेतों में ग्रामीण आलू, मटर, टमाटर, फ्रेंचबीन आदि नकदी फसलें उगाकर आजीविका कमाते हैं। नवंबर से जुलाई तक नौ महीने ये ग्रामीण साड़ा तोक में ही रहते हैं। ग्रामीणों के करीब 70 बच्चे नौगांव ब्लाक मुख्यालय स्थित स्कूलों में पढ़ते हैं। साड़ा तोक से सड़क तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को कमल नदी पार करनी पड़ती है। सालों से ग्रामीण यहां पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक ग्रामीणों की सुनवाई नहीं हुई।
इस हाल में ग्रामीण कमल नदी पर बल्लियों से तैयार अस्थायी पुल के सहारे जोखिमभरी आवाजाही करने को मजबूर हैं। इस रास्ते पर पूर्व में हुए हादसों में कई ग्रामीण चोटिल हो चुके हैं। इसके बावजूद सरकार व शासन-प्रशासन सुध लेने को राजी नहीं है। गांव के जयवीर सिंह राणा, जयेंद्र सिंह, जयपाल सिंह, भजन दास ने बताया कि गर्मी एवं बरसात सीजन में नदी में पानी बढ़ने पर तो अस्थायी पुल भी बह जाता है। तब ग्रामीणों को कई किमी का फेरा डालकर आवाजाही करनी पड़ती है। पुल की समस्या के कारण गांव के कई परिवार नौगांव में ही कमरे लेकर बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं। बार-बार मांग करने पर भी सुनवाई नहीं होने से ग्रामीणों में रोष है।
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कोट........
थली गांव के लिए कमल नदी पर पुल निर्माण की मांग मेरे संज्ञान में नहीं है। मामले में पड़ताल की जाएगी कि पुल निर्माण का मामला कहां अटका है। इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा।
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अनुराग आर्य, एसडीएम बड़कोट।
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