उत्तरकाशी। आपदा को छह साल बीते, लेकिन डीएम कार्यालय से महज सौ मीटर दूर तिलोथ पुल का निर्माण अभी तक नहीं हो पाया है। अनुबंध के मुताबिक पुल का निर्माण अक्तूबर 2018 में पूरा होना था, लेकिन अभी तक लोनिवि द्वारा दरों का निर्धारण नहीं होने के कारण पुल का निर्माण कार्य अधर में लटका है। निकाय चुनाव में प्रत्याशी इस मुद्दे को भी खूब भुना रहे हैं।
अगस्त 2012 में गंगा भागीरथी में आयी बाढ़ में तिलोथ पुल को जोड़ने वाली एप्रोच रोड बह गई थी। इस हिस्से में आवाजाही सुचारु करने के लिए दो साल बाद इस हिस्से में बेली ब्रिज तैयार कर आवाजाही सुचारु की गई। आपदा के बाद पुनर्निर्माण के तहत यहां करीब साढ़े आठ करोड़ लागत से 42 मीटर स्पान का डबल लेन स्टील गार्डर पुल स्वीकृत किया गया। डेढ़ साल पहले यहां बेली ब्रिज से वाहनों की आवाजाही बंद कर नए पुल का निर्माण शुरू किया गया था। अनुबंध के मुताबिक पुल का निर्माण अक्तूबर 2018 तक पूरा होना था। हैरानी की बात यह है कि अभी तक पुल का एबटमेंट भी तैयार नहीं हो पाया है।
पुल तैयार नहीं होने के कारण तिलोथ, मांडों, जसपुर ग्रामीणों के साथ ही जल विद्युत निगम के अधिकारी-कर्मचारियों व नगर क्षेत्र से तिलोथ स्थित स्कूलों में आवाजाही करने वाले छात्र-छात्राओं को खासी दिक्कत हो रही है। आजकल निकाय चुनावों में भी तिलोथ पुल का मुद्दा गरमाया हुआ है। प्रत्याशी इसे सरकार और सत्ता पर काबिज राजनीतिक दलों की नाकामी बताकर मतदाताओं में प्रचारित कर रहे हैं। पुल निर्माण में लगे ठेकेदार का कहना है कि पुल के डिजाइन में किए गए बदलाव के अनुसार इसकी दरों का पुनर्निर्धारण नहीं होने के कारण ही पुल का काम रुका हुआ है।
कोट
अनुबंध के बाद पुल के डिजाइन में कुछ बदलाव किए गए हैं। नगर की ओर वाला एबटमेंट आठ के बजाय दस मीटर चौड़ा बनाया जा रहा है। इसका रिवाइज्ड इस्टीमेट बनाया जा रहा है। जल्द ही इंडियन रोड कांग्रेस से दरें स्वीकृत कराकर पुल का शीघ्र निर्माण कराया जाएगा।
जेपी गुप्ता, अधीक्षण अभियंता लोनिवि उत्तरकाशी।