उत्तरकाशी। बीते पांच दिन से गाजणा क्षेत्र के गांवों में चल रहा हलवा देवता मेला शनिवार को भेटियारा गांव में संपन्न हुआ। इस दौरान पश्वा पर अवतरित देवता ने पांच किलो से ज्यादा हलवा (बाड़ी) खाया। ग्रामीणों ने देव डोलियों के साथ नृत्य कर क्षेत्र की सुख, समृद्धि एवं शांति की कामना की।
गाजणा क्षेत्र के गांवों में तीन साल में होने वाला श्री चौरंगी देवता मेला हर आयोजन के साथ भव्य रूप लेता जा रहा है। मेले में पश्वा पर देवता अवतरित होने पर वह पांच किलो से ज्यादा हलवा खा जाता है, तो मेला हलवा देवता के नाम से प्रचारित हो गया। बीते छह नवंबर को चौंडियाट गांव में मेले का शुभारंभ हुआ। इसके बाद अगले दिन दिखोली, 8 नवंबर को सौड़ एवं 9 नवंबर को लोदाड़ा गांव में मेले का आयोजन किया गया। शनिवार को भेटियारा गांव में भव्य रूप से मेले का समापन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि इस तरह के पारंपरिक मेले हमारी समृद्ध संस्कृति की पहचान हैं और इन्हें संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
क्षेत्र के हरि महाराज, ओणेश्वर महादेव, भैरव देवता, काली माता, नाग देवता आदि देवी-देवताओं की डोलियों एवं निशान के साथ सैकड़ों ग्रामीण मेले में शामिल हुए। इस दौरान ग्रामीणों ने देव डोलियों के साथ पारंपरिक रांसो एवं तांदी नृत्य कर क्षेत्र की सुख, समृद्धि एवं शांति की कामना की। पश्वा पर देवता अवतरित होने पर उसने पांच किलों से ज्यादा हलवा खाया। मेले के समापन देवता के पश्वा ने कंडाली से ग्रामीणों को आशीर्वाद दिया। मेले के समापन पर पांच गांव गाजणा के ग्रामीणों ने दिखोली स्थित तामेश्वर महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया। इस मौके पर चारधाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल, जयप्रकाश नौटियाल, मेला समिति के अध्यक्ष किशोरी लाल नौटियाल, अव्वल सिंह बुटोला, नागेंद्र उनियाल, सुमन भंडारी, मायाराम कंडियाल, सुकेश नौटियाल, कमलाराम नौटियाल, कातकू लाल आदि मौजूद रहे।