बड़कोट। यमुनोत्री धाम की अनदेखी तीर्थयात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। करीब दो माह पूर्व आपदा से धाम में तप्त कुंड व स्नान घाट क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन इनके जीर्णोद्धार पर शासन-प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
तीर्थ पुरोहित सुबोध उनियाल, प्रीतम प्रसाद, प्रदीप उनियाल आदि ने बताया कि यमुनोत्री धाम में तप्त कुंड व यमुना नदी में स्नान करने का बड़ा महत्व है। विगत 16 जुलाई को आई आपदा ने यमुनोत्री धाम का भूगोल ही बदल दिया है। आपदा में महिला श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए तप्त कुंड की बुनियाद नदी के कटाव से खोखली हो गई है, जबकि कुंड की दीवारों में भी दरारें पड़ गई हैं। वहीं यमुना नदी किनारे बनाए गए स्नान घाट भी तबाह हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर अगले यात्रा सीजन से पूर्व धाम की मरम्मत नहीं कराई गई, तो चार धाम यात्रा पर टिकी आर्थिकी पूरी तरह चरमरा जाएगी। उन्होंने शासन-प्रशासन से केदारनाथ की तर्ज पर यमुनोत्री धाम का भी जीर्णोद्धार कराने की मांग की है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता पीएस रावत ने बताया कि धाम के जीर्णोद्धार के लिए करीब डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।