चिन्यालीसौड़। सहकार भारती वन उपज प्रकोष्ठ की बैठक में जड़ी-बूटी कृषिकरण एवं विदोहन के माध्यम से गांवों में स्वरोजगार के अवसर तैयार करने पर चर्चा की गई। साथ ही स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों के विपणन की मांग की गई।
बीते रोज सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में सहकार भारती के वन उपज प्रकोष्ठ की बैठक हुई। बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली जड़ी-बूटियों के कृषिकरण एवं इनके उपयोग पर चर्चा की गई। प्रकोष्ठ के संगठन प्रमुख मुकेश नेगी ने कहा कि पहाड़ में जड़ी-बूटी उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। यदि ग्रामीणों को इसके कृषिकरण और विदोहन के अधिकार मिलें तो गांव में स्वरोजगार के अवसर तैयार होने से पलायन पर भी रोक लग सकेगी। उन्होंने सहकार भारती के माध्यम से राज्य एवं केंद्र सरकार से जड़ी-बूटी एवं वन उपज के विदोहन की अनुमति स्थानीय ग्रामीणों को देने की मांग की। इस मौके पर प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मानंद बिजल्वाण, भक्ति प्रसाद नौटियाल, मुरारीलाल जगूड़ी, रोशनी पडियार, अरविंद नेगी, गोपाल रावत, आत्माराम डबराल, सोहन खंडूड़ी, मुकेश नौटियाल आदि मौजूद रहे।