उत्तरकाशी। गंगा तीर्थ विश्व शांति सद्भावना धाम में आयोजित गंगा भागवत कथा के दूसरे दिन संत डा. दुर्गेश आचार्य ने मां गंगा के संरक्षण के लिए जागृति अभियान चलाने की बात कही। उन्होंने कहा कि गंगा बहता जल नहीं, बल्कि प्रणादायनी और हमारी संस्कृति की धरोहर है। गंगा के सहारे भारत देश के 70 हजार करोड़ लोगों का पालन-पोषण हो रहा है, लेकिन यही लोग आज अपनी अज्ञानता के चलते गंगा को दूषित और अपवित्र कर रहे हैं।
आचार्य ने कहा कि मां गंगा अपने उद्गम स्थल गोमुख से ही मैली होने लगी है, जो गंगा सागर तक पहुंचते-पहुंचते सीवर, फैक्ट्री की गंदगी और प्रदूषण के बोझ तले दबकर नाले में तब्दील हो रही है। ऐसे में अब लोगों को जागरूक करने के लिए वह गोमुख से गंगासागर तक जन जागृति अभियान चलाएंगे, जिसके तहत गंगा कथा और वैज्ञानिक शोधों की जानकारी साझा कर लोगों को गंगा संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे। इस दौरान उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज में आ रही विकृतियों के चलते भ्रूण हत्या जैसे पाप बढ़ रहे हैं। इस अवसर पर महामाया प्रसाद शास्त्री ने सभी लोगों से मां गंगा के संरक्षण के साथ ही कन्या भ्रूण हत्या जैसे पाप से बचने की अपील की।