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खतरे की जद में आए यमुनोत्री धाम की सुध कब लेगी सरकार?

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बड़कोट (उत्तरकाशी)। यमुनोत्री मंदिर के सिरहाने 90 डिग्री ढाल पर खड़े कालिंदी पर्वत से पूर्व में हुए भूस्खलन से मंदिर कई बार क्षतिग्रस्त हो चुका है, जबकि यमुना के प्रवाह पथ पर जमा मलबा कभी भी यमुना के प्रवाह को अवरुद्ध कर यहां बड़ी तबाही का कारण बन सकता है।
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वर्ष 2004 में पहाड़ी से हुए भूस्खलन से यमुनोत्री मंदिर परिसर में छह लोगों की मौत हो गई थी। तब सरकार ने कालिंदी पर्वत के ट्रीटमेंट के लिए योजना तो बनायी, लेकिन धरातल पर नहीं उतरी। वर्ष 2007 में यमुना के उद्गम के मुहाने पर झील बनने से यहां तटवर्ती हिस्सों में कटाव हुआ था। इसके बाद वर्ष 2010 और 2013 में भी मंदिर परिसर को नुकसान पहुंचा था। तब भूवैज्ञानिकों ने भी धाम का सर्वे कर यहां सुरक्षा के उपाय सुझाए थे। यह सुझाव आज तक शासन की फाइलों में धूल फांक रहे हैं। यहां तक कि धाम में हेलीपैड तक नहीं है। तीर्थपुरोहित पवन प्रकाश उनियाल, कीर्तेश्वर उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल आदि का कहना है कि किसी सरकार ने यमुनोत्री धाम की सुध नहीं ली। डीएम डा. आशीष चौहान का कहना है कि धाम में यमुना नदी के किनारे बाढ़ सुरक्षा कार्य और कालिंदी पर्वत के ट्रीटमेंट की योजना किस स्तर पर लंबित है, इसका पता लगाया जाएगा। जल्द ही धाम की सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों से सर्वे कराकर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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