उत्तरकाशी। सवा दो मेगावाट की पिलंगगाड लघु जल विद्युत परियोजना नदी के पानी में सिल्ट (गाद) की मात्रा बढ़ने के कारण बीते चार दिन से बंद पड़ी है। परियोजना की लागत से ज्यादा मरम्मत पर खर्च कर बड़ी मुश्किल से पांच साल बाद इस परियोजना से विद्युत उत्पादन शुरू हुआ था, लेकिन मरम्मत कार्य अधूरे होने से एक बार फिर परियोजना ठप पड़ गई है।
बता दें कि वर्ष 2004 में 8.90 करोड़ रुपये लागत से पिलंगगाड पर सवा दो मेगावाट की पिलंगगाड लघु जल विद्युत परियोजना का निर्माण कराया गया था। जून 2013 की आपदा में इस परियोजना को काफी क्षति पहुंची और परियोजना ठप पड़ गई थी। पांच साल के लंबे इंतजार और लागत से ज्यादा 11.25 करोड़ रुपये खर्च इसी साल फरवरी में इस परियोजना से विद्युत उत्पादन शुरू किया गया था, लेकिन मरम्मत कार्य आधे-अधूरे छोड़े जाने से एक बार फिर बीते 16 जुलाई की रात को हुई बारिश के बाद उत्पादन ठप हो गया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि परियोजना के इंटेक चैंबर और डिसिल्टिंग चैंबर का ढांचा तो बना है, लेकिन गेट का काम अधूरा पड़ा है। ऐसे में पानी को फिल्टर करने की व्यवस्था नहीं होने से बीते दिनों हुई बारिश के बाद नदी में बढ़ी सिल्ट टरबाइनों तक पहुंचने लगे। ऐसे में विद्युत उत्पादन बंद करना पड़ा। लागत से ज्यादा मरम्मत पर खर्च कर पांच साल बाद परियोजना चालू करने के बाद भी इसे सुचारु ढंग से संचालित करने की स्थिति नहीं बनने पर सवाल उठ रहे हैं।
कोट...
परियोजना के हेड पर अभी काम नहीं हो पाया है। गेट का काम पूरा नहीं होने के कारण इसे पावर चैनल से नहीं जोड़ा जा सका है। दिसंबर तक परियोजना का मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
सीएस राणा, उप महाप्रबंधक जल विद्युत निगम।