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प्रशासन ने आनन-फानन में शुरू की यमुनोत्री यात्रा, तीर्थ पुरोहितों ने जताई नाराजगी-compat

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बड़कोट (उत्तरकाशी)। सोमवार देर रात अतिवृष्टि से यमुना नदी में आए उफान से यमुनोत्री धाम में मची तबाही के 24 घंटे बाद ही प्रशासन यमुनोत्री धाम की यात्रा सुचारु होने का दावा कर रहा है, जबकि धरातल पर स्थिति बेहद खराब है। कुछेक यात्री जान जोखिम में डालकर यमुनोत्री धाम तक पहुंचने का साहस तो जुटा रहे हैं, लेकिन ऐसे में किसी हादसे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
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ओजरी डबरकोट वाले हिस्से में रुक-रुक कर भूस्खलन का सिलसिला जारी है। यहां मंगलवार रात को स्वयं डीएम एवं एसपी की गाड़ी पर भारी बोल्डर गिरने पर उन्हें भाग कर किसी तरह जान बचानी पड़ी थी। इस हिस्से में यात्रियों को तिर्खली कुंसाला होते हुए पैदल जानकीचट्टी की ओर भेजा जा रहा है, लेकिन इस मार्ग पर भी जगह-जगह गदेरों का पानी आने से आवाजाही खासी जोखिम भरी है। राम मंदिर के पास जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग का करीब तीस मीटर हिस्सा तबाह होने पर प्रशासन ने यहां पत्थरों की सीढ़ी तैयार कर किसी तरह आवाजाही की व्यवस्था तो की है, लेकिन यहां पैदल चलना ही खासा जोखिम भरा है, घोड़े-खच्चर और डंडी-कंडी चलना तो दूर की बात है। यमुनोत्री धाम में मंदिर को जोड़ने वाली पुलिया यमुना के उफान में बह चुकी है। अब यात्रियों के लिए पुराने पुल से दूसरी ओर जाकर जोखिम भरे रास्ते से आवाजाही की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा यमुनोत्री धाम में तबाही का मंजर भी खासा डरावना है। धाम में अभी तक विद्युत आपूर्ति सुचारु नहीं हुई है। स्नान घाट की कोई व्यवस्था नहीं है। इन विपरीत स्थितियों के बावजूद प्रशासन ने बुधवार तड़के से यमुनोत्री धाम की यात्रा सुचारु होने का दावा किया है। बुधवार को महज 25 तीर्थयात्री जान जोखिम में डालकर यमुनोत्री धाम की यात्रा पर पहुंचे। मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट और मानसून सीजन की बरसात को देखते हुए ऐसे में किसी अनहोनी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
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गलत है यात्रियों की जान खतरे में डालना
बड़कोट। आपदा में यमुनोत्री धाम में मची तबाही के बाद आधी अधूरी तैयारियों के बीच यात्रा शुरू किए जाने पर तीर्थ पुरोहितों ने नाराजगी जताई है। पवन प्रकाश उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल आदि तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि अभी तक यमुनोत्री मंदिर और आसपास में पसरा मलबा नहीं हटाया गया है। विद्युत आपूर्ति ठप पड़ी है। ओजरी डबरकोट एवं तिर्खली कुंसाला वाला रास्ता खासा जोखिम भरा है। व्यवस्थाएं दुरुस्त कराए बगैर यात्रा शुरू किया जाना तीर्थयात्रियों की जान को खतरे में डालना है। ऐसे में यदि कोई हादसा हुआ तो धाम को लेकर देश-दुनिया में गलत संदेश जाएगा।
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विधायक ने किया जानकीचट्टी का निरीक्षण
बड़कोट। जल प्रलय से मची तबाही का निरीक्षण करने के लिए यमुनोत्री विधायक केदार रावत बुधवार को जानकी चट्टी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने आपदा प्रभावित व्यापारियों से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावितों को जल्द ही अहेतुक राशि वितरित कराने के साथ ही मानकों के अनुसार राहत राशि दिलाई जाएगी। उन्होंने यमुनोत्री धाम की सुरक्षा को लेकर शीघ्र मुख्यमंत्री से वार्ता करने की बात कही। विधायक ने प्रशासन को शीघ्र आपदा में ध्वस्त व्यवस्थाएं बहाल करने के निर्देश दिए। ब्यूरो

कोट.........
यमुनोत्री धाम की यात्रा सुचारु करा दी गई है। जोखिम वाले स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। राम मंदिर से आगे क्षतिग्रस्त रास्ते के दूसरी ओर कुछ घोड़े-खच्चर मौजूद हैं। इनसे यात्रियों को सुविधा मिलेगी। यमुनोत्री में दूसरी पुलिया से होकर जाने वाले रास्ते को दुरुस्त कराने को कहा गया है। धाम क्षेत्र में हुए नुकसान से शासन को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जा रही हैं।
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-डा.आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
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