उत्तरकाशी। आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील सीमांत जनपद उत्तरकाशी में जर्जर हुए दर्जनों विद्यालय भवन किसी बड़े हादसे को न्यौता दे रहे हैं। जनपद में 16 विद्यालय भवन बेहद जर्जर हालत में हैं। जबकि 121 को बड़ी मरम्मत की दरकार है। इन स्कूलों में पढ़ रहे नौनिहालों की जान को लेकर न तो शिक्षा महकमा गंभीर है और न ही सरकार।
यूं तो मानसून सीजन में जनपद की अधिकांश आबादी पर आपदा का साया मंडराता है, लेकिन शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते जर्जर हुए दर्जनों विद्यालय भवनों में पढ़ने वाले बच्चों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में कुल 770 प्राथमिक विद्यालय और 265 जूनियर हाईस्कूल हैं। इनमें से 121 विद्यालय भवनों को बड़ी मरम्मत की जरूरत है, जबकि 14 विद्यालय भवन तो बेहद जर्जर हालत में हैं। जूनियर हाईस्कूल बिंग्सी नौगांव, बार्सू भटवाड़ी और डिंगाड़ी तथा प्राथमिक विद्यालय नगाणगांव, ठडियार, सर बडियार, बेष्टी, हल्याड़ी, कुपड़ा, मसरी, सट्टा, गडियारा, नपेड़गांव एवं पालर के जर्जर हुए भवनों में बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं।
जिले में कुछ 127 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें से सात उच्चीकृत विद्यालयों को तो अभी तक भवन ही नसीब नहीं हुए, जबकि 16 में किसी तरह कम कक्षा कक्षों में काम चलाया जा रहा है। मोरी प्रखंड में राइंका जखोल और राइंका नैटवाड़ का भवन बेहद जर्जर हालत में हैं। राइंका डामटा में आजकल मरम्मत का काम चल रहा है। जर्जर हुए विद्यालय भवनों में हादसे की आशंका को देखते हुए अभिभावक बारिश के दौरान अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं।
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जिले में जर्जर हुए विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण तथा अन्य भवनों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजे गए हैं। बजट स्वीकृत होने पर ही इन भवनों को दुरुस्त कराया जा सकता है। कुछ जगहों पर एनजीओ की मदद से विद्यालय भवनों को दुरुस्त कराया गया है।
रमेश चंद्र आर्य, मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी।