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देवीसौड़ पुल की एप्रोच रोड में आड़े आ रही नगर पालिका की दुकानें

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चिन्यालीसौड़। गमरी-दिचली पट्टियों को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित देवीसौड़ मोटर पुल का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। वर्ष 2013 से बन रहे इस आर्च ब्रिज के एप्रोच मार्ग में पालिका की दुकानें बनी होने के कारण इसका मुहाना बंद हो गया है। दुकानें हटाने के बदले पालिका प्रशासन मुआवजे की मांग कर रहा है, जबकि पुनर्वास विभाग इस स्थान को अपनी संपत्ति बताकर मुआवजा देने से इंकार कर रहा है। ऐसे में सरकारी विभागों की इस लड़ाई का खामियाजा पुल से यातायात शुरू होने का इंतजार कर रही जनता को भुगतना पड़ रहा है।
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टिहरी बांध की झील का विस्तार बढ़ने के बाद गमरी-दिचली पट्टियों को जोड़ने के लिए देवीसौड़ में नए पुल का निर्माण शुरू कराया गया था। वर्ष 2013 में शुरू हुए निर्माण कार्य को 15 माह के भीतर पूरा होना था, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका।
पालिका ने वर्ष 2016 में करीब 13 लाख की लागत से नौ दुकानें बनाई थी। इनमें से छह दुकानें पीपलमंडी की तरफ से पुल की ओर जाने वाले एप्रोच मार्ग को बाधित कर रही है। इस संबंध में पुनर्वास विभाग की ओर से पालिका प्रशासन को कई बार नोटिस भी दिया गया, लेकिन पालिका अधिकारी इन छह दुकानों को हटाने के बदले मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। पुनर्वास विभाग दुकानों को अवैध बताकर जिला प्रशासन से इन्हें तोड़ने की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में जुलाई के अंत तक नए पुल से यातायात शुरू होने की तैयारियों को झटका लगा है। वहीं मानसून सीजन के आते ही वर्तमान में सुचारु पुराना पुल भी झील का जलस्तर बढ़ने से डूब जाएगा, जिससे ग्रामीणों को एक बार फिर मजबूरन नाव के सहारे ही आवाजाही करनी पड़ेगी।
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कोट:
पालिका की छह दुकानें पुल के एप्रोच मार्ग की जद में आ रही है। इन सभी दुकानों में किरायदार हैं। इन दुकानों के हटने से होने वाले नुकसान का मुआवजा मिलना चाहिए। हमने पूर्व में पुनर्वास विभाग और प्रशासन के साथ हुई बैठक में भी यह मांग उठाई थी।
- एचएस कठैत, ईओ, पालिका चिन्यालीसौड़।
कोट:
पुल के 680 मीटर लंबे एप्रोच मार्ग के अंतिम आठ मीटर हिस्से में पालिका की छह दुकानें आ रही हैं। जिसे हटाने के लिए कई बार पालिका प्रशासन को नोटिस भेजा गया है, लेकिन पालिका मुआवजे की मांग कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा भूमि विभाग को आवंटित करने के बाद पालिका ने दुकानें बनाई हैं। लिहाजा सभी दुकानें अवैध हैं और विभाग इनको हटाने का मुआवजा नहीं देगा।
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- सुबोध मैठाणी, ईई, पुनर्वास विभाग।
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