बड़कोट (उत्तरकाशी)।
यमुनोत्री धाम की यात्रा पर पहुंच रहे तीर्थयात्रियों को जानकीचट्टी से यमुनोत्री संकरे पैदल यात्रा मार्ग पर आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संकरे पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर एवं डंडी-कंडी के साथ ही पैदल चलने से यहां जगह-जगह जाम लग रहा है। लोगों की समस्या को देखते हुए वर्ष 2011 में खरसाली से यमुनोत्री तक रोपवे स्वीकृत तो हुआ था, लेकिन सात वर्ष बाद भी इसका निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
यमुनोत्री पहुंचने के लिए यात्रियों को जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक पांच किमी पैदल दूरी तय करनी होती है। यात्रियों की सुविधा के लिए घोड़ा-खच्चर व डंडी-कंडी की व्यवस्था है। महज आठ से दस फीट चौड़े इस पैदल मार्ग पर दोनों ओर से घोड़े-खच्चर एवं डंडी-कंडी व पैदल यात्रियों की आवाजाही से यहां जाम की स्थिति बन रही है। समस्या को देखते हुए वर्ष 2011 में खरसाली से यमुनोत्री तक रोपवे स्वीकृत किया गया था। 70 करोड़ रुपये की लागत से लगने वाले रोपवे निर्माण का जिम्मा पीपीपी मोड पर मुंबई की टॉपवर्थ इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सौंपा गया था। रोपवे के सर्वे के साथ ही वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृति व वन भूमि हस्तांतरण की तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं, लेकिन अभी तक धरातल पर इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
कोट...
खरसाली से यमुनोत्री रोपवे का सर्वे एवं पर्यावरणीय स्वीकृति आदि औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से काम के लिए कंपनी को बैंकों से वित्तीय सहयोग नहीं मिला। अब नए सिरे से सर्वे आदि औपचारिकताएं पूरी कराकर रोपवे का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
सतीश बहुगुणा, पर्यटन विकास अधिकारी मुख्यालय।