चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। गरीब मेधावी बच्चों को निशुल्क शिक्षा एवं छात्रावास की सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से खोला गया आवासीय विद्यालय सरकारी उपेक्षा का शिकार है। स्थापना के दस साल के भीतर विद्यालय का नाम तो तीन बार बदल गया, लेकिन विद्यालय एवं छात्रावास भवन निर्माण की सरकार ने सुध नहीं ली। यह आवासीय विद्यालय राइंका चिन्यालीसौड़ के पांच बदहाल कमरों में ही संचालित किया जा रहा है।
केंद्र सरकार के जवाहर नवोदय विद्यालय की तर्ज पर वर्ष 2006-07 में राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने चिन्यालीसौड़ में राजीव गांधी नवोदय विद्यालय स्वीकृत किया था। कक्षा छह से दसवीं तक संचालित विद्यालय में प्रवेश परीक्षा के आधार पर 70 प्रतिशत ग्रामीण और 30 प्रतिशत शहरी मेधावी बच्चों को प्रवेश दिया जाता है।
विद्यालय एवं छात्रावास भवन निर्माण के लिए बनचौरा धारकोट के ग्रामीणों ने वर्ष 2013 में 110 नाली जमीन दान दी, लेकिन अभी तक यहां भवनों का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। विद्यालय में छात्र संख्या 105 है। रात में कमरों में बच्चे बिस्तर बिछाकर सोते हैं और सुबह बिस्तर समेटकर इन्हीं कमरों में कक्षाएं चलती है। प्रधानाचार्य संजय कुमार का कहना है कि भवन निर्माण की कार्रवाई शासन स्तर पर गतिमान है। विद्यालय में जरूरी शिक्षक एवं स्टाफ मौजूद हैं। कुछ बच्चों को सामान्य खांसी बुखार की शिकायत थी। अब स्थिति सामान्य है।