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पोखरी के ग्रामीणों की पहल, सड़क भी बने और पर्यावरण भी बचे

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उत्तरकाशी। विकास भी हो और पर्यावरण भी संरक्षित रहे। इसके लिए पोखरी के ग्रामीणों ने अनूठी पहल की है। गांव के लिए स्वीकृत सड़क पर कटने वाले चीड़ के पेड़ों के एवज में ग्रामीणों ने गांव के निकट इससे ज्यादा पौधरोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
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निम बैंड से पोखरी गांव के लिए आठ सौ मीटर लंबी सड़क वर्ष 2004-05 में स्वीकृत हुई थी। निकटवर्ती डांग गांव के कुछ लोगों ने सड़क के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटने पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में रिट दायर की। वर्ष 2015 में हाईकोर्ट ने यह अपील खारिज करने के साथ ही अपने आदेश में सड़क निर्माण के लिए कम से कम पेड़ों का कटान करने की बात कही थी। इसके बावजूद अभी तक सड़क का निर्माण नहीं होने से पोखरी के ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीण बीते सात दिन से कलक्ट्रेट में धरने पर डटे हैं, जबकि पड़ोसी डांग के ग्रामीण सड़क में आ रहे पेड़ों को रक्षासूत्र बांध कर इन्हें किसी सूरत में नहीं कटने देने पर अड़े हैं।
मंगलवार को पोखरी के ग्रामीणों ने गांव के चालधार तोक में बांज, बुरांस, देवदार, अखरोट, गुरियाल, पयां आदि प्रजातियों के पौधे रोपे। उन्होंने कहा कि पूर्व में लोनिवि द्वारा किए गए एलाइनमेंट में सड़क पर 469 चीड़ के पेड़ आ रहे थे। इसके एवज में उन्होंने उपयोगी प्रजातियों के 638 पौधे रोपे हैं। ग्रामीण पौधों को संरक्षित कर सघन वन तैयार करेंगे। उन्होंने सड़क का कटान शुरू होने पर इसके दोनों ओर भी उपयोगी वृक्ष पनपाने का संकल्प लिया। अभियान में वन सरपंच सोबना देवी, बल्लू शाह (85) पोखरी गांव के बलबीर सिंह, शूरवीर नेगी, धर्म सिंह, चतर सिंह, जमन सिंह, सुधा कैंतुरा, दशरथ नेगी, पुष्पा देवी, नत्थी देवी, गौरव, कोमल, पूनम कैंतुरा, किशना आदि शामिल हुए। वहीं हिमालय भागीरथी आश्रम मातली के सुरेश ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर सड़क निर्माण का विरोध किया है।
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