उत्तरकाशी। गंगोरी में गंगोत्री हाईवे पर दस साल में तीन पुल धराशायी हो चुके हैं। सामरिक महत्व के गंगोत्री हाईवे पर वर्ष 2012 की आपदा के बाद स्वारीगाड़ में बना वैली ब्रिज भी जर्जर हालत में है। आपदा के पांच साल बाद भी गंगोरी और स्वारीगाड़ में स्थायी पक्के पुलों का निर्माण न होने से सरकार की सामरिक तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा, भी जिले में आधा दर्जन से ज्यादा स्थानों पर यातायात अस्थायी वैली ब्रिजों के भरोसे है।
गंगोरी में पुल पुराना होने पर बीआरओ की ओर से वर्ष 2008 में नए गार्डर ब्रिज का निर्माण कराया गया था, लेकिन यह पुल 18 मार्च 2008 को भरभरा कर ढह गया। इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई थी। तब बीआरओ के अधिकारियों ने ठेकेदार पर जवाबदेही तय की, लेकिन ठेकेदार ने बीआरओ के डिजाइन और उन्हीं के अधिकारियों की देखरेख में पुल का निर्माण कराने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ लिया। इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। पुराने पुल से ही आवाजाही चलती रही और यह पुल भी 3 अगस्त 2012 को असीगंगा में आई बाढ़ में बह गया। तब बीआरओ ने आनन-फानन में पुराने ढहे पुल के एबटमेंट पर ही वैली ब्रिज तैयार किया था।
अगस्त 2012 की बाढ़ में ही गंगोत्री हाईवे पर स्वारीगाड़ में बना पुल भी बह गया था और वहां भी बीआरओ ने एक वैली ब्रिज तैयार किया। इसके निर्माण के दौरान हुए हादसे में बीआरओ के एक कैप्टन की मौत भी हुई थी। यह पुल भी जर्जर हाल में है। इसकी प्लेटें जगह-जगह उखड़ गई हैं। यहां अभी तक पक्के पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। उसी बाढ़ में तिलोथ को उत्तरकाशी नगर से जोड़ने वाले मोटर पुल की एप्रोच बह गई थी। इस हिस्से में भी लोनिवि ने वैली ब्रिज तैयार किया था। यहां भी पक्के पुल का इंतजार है। इसके अलावा, वर्तमान में यमुनोत्री हाईवे पर अगलाड़ गाड़ के साथ ही लिंक मोटर मार्गों पर हर्षिल, धौंतरी, भराणगांव, आराकोट-चीवां-बालचा तथा गंगोरी-संगमचट्टी मोटर मार्ग के डिगिला में वैली ब्रिज पर ही वाहन दौड़ रहे हैं।
अभियांत्रिकी पर उठ रहे सवाल
उत्तरकाशी।
दस साल में जिले में एक के बाद एक कई तैयार और निर्माणाधीन पुल ढहने से अभियंताओं के कौशल पर भी सवाल उठ रहे हैं, जबकि जर्जर हालत में पहुंचे कई पुल हादसों को न्योता दे रहे हैं। 18 मार्च 2008 को गंगोरी में बीआरओ का तैयार गार्डर ब्रिज ढहने से एक की मौत हो गई थी। 1 जुलाई 2014 को धौंतरी-कमद मोटर मार्ग पर तैयार मोटर पुल ढहा। 4 जुलाई 2014 में ही गंगोरी-संगमचट्टी सड़क पर डिगिला में निर्माणाधीन वैली ब्रिज का एक हिस्सा ढहने से एक मजदूर की मौत हो गई थी। जून 2016 में चली तेज आंधी में अठाली के पास निर्माणाधीन मोटर पुल का पूरा ढांचा ही उड़कर दूर जा गिरा था। इसके अलावा, जर्जर हालत में पहुंचा जोशियाड़ा मोटर पुल भी हादसे को न्योता दे रहा है।
कोट.........
लोनिवि की पांच सड़कों पर वैली ब्रिज से वाहनों की आवाजाही हो रही है। तिलोथ में नए पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। विश्व बैंक ने वैली ब्रिज वाले स्थानों पर पक्के पुलों के निर्माण के लिए सर्वे कराया है। अभी कार्यवाही जारी है। -एसके राय, अधीक्षण अभियंता लोनिवि उत्तरकाशी।
कोट.........
सामरिक महत्व के गंगोत्री हाईवे पर गंगोरी और स्वारीगाड़ में आपदा के पांच साल बाद भी स्थायी पक्के पुलों का निर्माण क्यों नहीं हुआ, इसकी पड़ताल कराई जाएगी। इसमें आ रही अड़चनों को दूर कराकर शीघ्र पक्के पुलों का निर्माण कराया जाएगा।
डा.आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
गंगोत्री हाईवे पर गंगोरी एवं स्वारीगाड़ में स्थायी पक्के पुलों के निर्माण का प्रस्ताव पूर्व में भेजा गया है। तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलने से अभी पुलों का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। ऑलवेदर रोड के तहत उक्त स्थानों पर नए पुल प्रस्तावित हैं। -एके राय, द्वितीय कमान अधिकारी बीआरओ टास्क फोर्स।