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बिना टी शर्ट के उतार दिया खिलाड़ियों को फुटबॉल के मैदान में

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उत्तरकाशी। ग्राउंड जीरो स्तर पर खिलाड़ियों की खोज और उन्हें तराशने को लेकर उत्तराखंड सरकार ने खेल महाकुंभ का जो सपना देखा है, उसको जिले में अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। यहां खेल महाकुंभ की ब्लॉक स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को बिना टी शर्ट के खेल मैदान पर उतारा जा रहा है।
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दूरस्थ गांव से टैलेंट को तलाशने के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार ने खेल महाकुंभ का आयोजन किया है जिसमें करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं। जिले में खेल महाकुंभ के तहत ब्लॉक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता चल रही है। फुटबॉल के अलावा कुछ अन्य खेलकूद मनेरा स्टेडियम में हो रहे हैं। बृहस्पतिवार को मनेरा स्टेडियम में एमडीएस और ऋषिराम शिक्षण संस्थान मनेरा के बीच सेमीफाइनल मैच खेला जाना था, लेकिन जैसे ही टीमें मैच के लिए मैदान पर उतरी तो दोनों टीमों की ड्रेस एक समान पाए जाने पर आयोजक व निर्णायकों ने किसी एक टीम से बिना टी शर्ट के मैदान पर उतरने को कहा। इसका हल टॉस करके निकाला गया। एमडीएस की टीम टॉस हार गई, तो उनके खिलाड़ियों को बिना टी शर्ट के मैदान पर उतरना पड़ा। पूरा मैच टीम ने बिना टी शर्ट के खेला। खेलों में कई बार खिलाड़ी अति उत्साह में टी शर्ट जरूर उतारते हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब पूरा मैच सभी खिलाड़ियों बिना टी शर्ट के खेला है। इस मैच में बिना टी शर्ट के खेली एमडीएस की टीम को हार का सामना भी करना पड़ा।

क्या होता है प्रावधान-
जबकि ऐसी स्थिति में आयोजन कमेटी के पास दो ड्रेस मौजूद रहनी चाहिए। ताकि दोनो टीमों के पास एक जैसी ड्रेस होने पर वह किसी एक टीम को मैच के लिए ड्रेस उपलब्ध करवाएं। अगर ड्रेस उपलब्ध भी नहीं थी, तो ड्रेस आने तक मैच को पीछे भी शिफ्ट किया जा सकता था। लेकिन वहां मौजूद निर्णायकों और जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना ड्रेस के ही खिलाड़ियों को खेलने के लिए मजबूर कर दिया।
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कोट-
इसमें आयोजकों की गलती है। हमारी टीम मजबूरी में खेली है। हमने मैच से पहले ही बिना ड्रेस में खेलने से मना कर दिया था। छोटे छोटे बच्चे हैं बिना टी शर्ट के उतरने से खिलाड़ियों का मनोबल टूट जाता है।
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-दिनेश पयाल, पीटीआई, एमडीएस

जिस समय यह मैच हुआ मैं मैदान में नहीं था। उस समय मैं अन्य खिलाड़ियों को खाना खिला रहा था। निर्णायकों ने मैच करवाया है।
-पंकज कुमार, बीओ, युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग

मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है। मैं स्वयं मातली में खेल आयोजनों को देख रहा हूं। अगर ऐसा हुआ है तो यह गलत हुआ है।
-विजय प्रताप भंडारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी
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