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गंगा संरक्षण के लिए गोमुख में एकजुट हुए विशेषज्ञ

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गंगोत्री (उत्तरकाशी)। नमामि गंगे अभियान के तहत गोमुख में आयोजित सम्मेलन में वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और राजनेताओं ने एक स्वर में गोमुख और गंगा के संरक्षण के लिए धरातल पर कार्य करने पर जोर दिया है। उन्होंने अनियोजित विकास को गंगा के विनाश का जिम्मेदार ठहराया है।
नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (निम) द्वारा आयोजित सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की कमी, बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण और अनियंत्रित कूड़ा व फैक्ट्री के केमिकल से भी गंगा प्रदूषित हुई है। इस दौरान विधायक गोपाल रावत ने भोजवासा में एक पुल बनाने की घोषणा की है, ताकि यात्री और पर्वतारोही तपोवन, नंदनवन आदि अन्य स्थानों को सीधे पहुंच सके। इससे गोमुख का भी संरक्षण हो सकेगा। इस दौरान अपर सचिव राघव लंगर ने सभी को गंगा संरक्षण की शपथ दिलाते हुए सम्मेलन में उठे मुद्दों के लिए ठोस योजना बनाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण पर कार्य कर रहे लोगों को एक छत के नीचे लाया जाएगा, ताकि एक ही दिशा में बेहतर काम हो सके। कार्यक्रम के दौरान हरीश सेमवाल, गुलाब सिंह नेगी, दीपेंद्र पंवार, हरीश डंगवाल, केसर सिंह पंवार, आमोद पंवार आदि मौजूद थे।
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गंगा संरक्षण को लेकर विभिन्न विशेषज्ञों की राय
-गंगा के संरक्षण के लिए गोमुख ग्लेशियर को बचाना होगा। ग्लेशियर का पिघलना व उसके आसपास लैंडस्लाइड होना पर्यावरण में आ रहे बदलावों का नतीजा है।
-डा. पीएस नेगी, भूवैज्ञानिक

-गोमुख एक नाजुक व जटिल ग्लेशियर है, जिसको समझने के लिए अभी बहुत शोध करना होगा। गंगोत्री से उत्तरकाशीे इको सेंसिटिव जोन में सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना होगा, ताकि यहां का पर्यवरणतंत्र स्वस्थ रहे। -डा. नवीन जुयाल, भूवैज्ञानिक।

-वैज्ञानिकों की राय में भिन्नता व नेताओं में इच्छा शक्ति की कमी की वजह से गोमुख के संरक्षण में दिक्कत आ रही है। अब भाषणबाजी बंद कर जमीन में ठोस कार्य करने की जरूरत है।
-जगत सिंह जंगली, पर्यावरणविद।

-आज तक इको सेंसिटिव जोन के लिए राज्य सरकार ने कोई मास्टर प्लान नहीं बनाया है। सड़क के नाम पर भैरोंघाटी से गंगोत्री तक कई पेड़ काटे जा रहे हैं और मलबा गंगा में डाला जा रहा है।
- हेमंत ध्यानी, पर्यावरण कार्यकर्ता

-सबसे पहले मानव सभ्यता सरस्वती नदी के किनारे बसी थी, लेकिन लोगों ने नदी को विलुप्त कर दिया। इसके बाद गंगा नदी के किनारे सभ्यता बसी और अब यह नदी भी विलुप्ति की कगार पर पहुंच गई है।
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-प्रोफेसर आरसी भट्ट, पुरातत्ववेता।

-गंगा संरक्षण के लिए सभी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, एकजुट होना होगा। - प्रीतम पंवार, विधायक धनोल्टी।
- कुछ लोगों के लिए गंगा मां के समान है, लेकिन बाकी सब के लिए सिर्फ बहता पानी। आस्था, जागरूकता और संगठित प्रयास से ही गंगा को बचाया जा सकता है। - साधवी पंछी प्रकाश मई, संत।
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