उत्तरकाशी। जनकवि एवं संस्कृत कर्मी गिरीश तिवारी गिर्दा की पुण्यतिथि पर लोकरंग एवं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से उनकी याद में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गिर्दा के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों के साथ ही उत्तरकाशी में जनगीतों के जरिये राज्य आंदोलन में उनकी भूमिका व अलख जगाने के उनके निराले अंदाज पर चर्चा की गई।
अजीम-प्रेमजी सभागार आयोजित कार्यक्रम में गिर्दा की याद की शुरूआत लोक गायक ओम बधानी ने गिर्दा के जनगीतों उत्तराखंड मेरी मातृभूमि, जैंता एक दिन त आलू ओ दिन यू दुनि में के साथ की। उन्होंने कहा कि गिर्दा स्वभाव से सरल थे, तो वही जनमुद्दों के लिए अपने ही अंदाज मुखर दिखते थे। रंगकर्मी प्रमोद पैन्यूली ने गिर्दा पर आधारित प्रभा प्रोडक्शन की डाक्यूमेंट्री फिल्म गिर्दा की याद गिर्दा के बाद प्रस्तुत की, जिसमें पर्यावरणविद् सुरेश भाई ने कहा कि गिर्दा को उनके काम और विचार के साथ याद किया जाना चाहिए। इस मौके पर मदन मोहन बिजल्वाण, दिनेश भट्ट, कमलेश गुरुरानी, प्रधानाध्यापक सुमन रावत, सुरेंद्र पुरी आदि मौजूद थे। अंतिम चरण में पर्यावरण प्रेमी प्रताप पोखरियाल के नेतृत्व में सभी ने गिर्दा की स्मृति में पौधे रोपे।